नोटबंदी से महिलाओं में बहुत गुस्सा है: सुभाषिणी

भोपाल. अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाषिणी अली ने आज कहा कि देश की महिलाएं नोटबंदी के खिलाफ हैं और केंद्र सरकार के इस कदम से उनमें बहुत गुस्सा है.   यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सुभाषिणी ने कहा कि देश की महिलाएं नोटबंदी के खिलाफ हैं. सरकार के इस कदम से उनमें बहुत गुस्सा है और वे इससे परेशानी महसूस कर रही हैं.     उन्होंने कहा कि जनवादी महिला समिति के कल भोपाल में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में नोटबंदी के खिलाफ एक प्रस्ताव भी लाया गया है, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया. सुभाषिणी ने आरोप लगाया कि नोटबंदी से सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई को छीना है. उन्होंने कहा कि जो पैसा लोगों का बैंक में जमा है, उसे निकालने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. इससे लोग बैंकों से अपना पैसा भी नहीं निकाल पा रहे हैं.  उन्होंने कहा कि इससे आम जनता विशेषकर गरीब तबके की महिलाओं को बड़ी तकलीफ हो रही है, क्योंकि उनके पति जो छोटी-मोटी नौकरी करते हैं, उनको उनके मालिक वेतन देने की स्थिति में नहीं हैं.
-हजारों लोगों का काम छूट गया 
   सुभाषिणी ने बताया कि नोटबंदी के चलते हजारों लोगों का काम छूट गया और वे काम छोड़कर वापस अपने-अपने गांव पलायन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज हमारे पास बच्चों को पालने, दूध पिलाने एवं पढ़ाई कराने तक के लिए पैसा नहीं है. अब हम क्या करें, यह हमारे सामने सवाल पैदा हो गया है.
-किसान की फसल को कोई खरीद नहीं रहा 
सुभाषिणी ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के चलते किसान की फसल को कोई खरीद नहीं रहा है, जिसके कारण सब्जियां सड़ रही हैं और अगली फसल का किसान कैसे इंतजाम करेंगे, जब उनके पास बीज, सिंचाई, खाद के लिए पैसा नहीं है. तीन दिन पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ हुए प्रदर्शन के कारण भोपाल में एक कार्यक्रम में उनके शामिल न होने की घटना पर सुभाषिणी ने कहा कि मैं समझती हूं कि मानव अधिकार दिवस के मौके पर यह बहुत ही ज्यादा अनुचित था और एक तरह से तमाम जनवादी परंपराओं का उल्लंघन था.
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री के साथ ऐसा हो, तो यह उस राज्य के लोगों को भी अपमान है. ये सबका अपमान है. संविधान का भी अपमान है.