नर्मदा यात्रा नई सभ्यता और समाज की रचना का अभियान : कैलाश सत्यार्थी

भोपाल. नोबेल पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी ने मध्यप्रदेश में चल रही 'नमामि देवी नर्मदे-सेवा यात्रा' को इतिहास की रचना का काम बताते हुए कहा कि जब जाति और धर्म के लोग किसी मुद्दे पर एक साथ चलते हैं तो नई सभ्यता का निर्माण होता है.
    नर्मदा सेवा यात्रा के 30वें दिन होशंगाबाद जिले के ग्राम उमरधा के पांसी घाट पर यात्रा के जनसंवाद कार्यक्रम को कल सम्बोधित करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि नमामि देवी नर्मदे-सेवा यात्रा नई सभ्यता और समाज की रचना का अभियान है. जब सभी जाति और धर्म के लोग किसी मुद्दे पर एक साथ चलते हैं तो नई सभ्यता का निर्माण होता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जनता का आंदोलन बनाया है. उन्होंने कहा कि मेरा सपना था कि देश की कोई नदी लंदन की टेम्स नदी और जर्मनी की राइन नदी की तरह साफ हो. यह सपना नर्मदा सेवा यात्रा पूरा करेगी. जहां समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, वहां स्थायी परिवर्तन होता है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देशों के बीच तनाव का कारण पानी है. इस यात्रा में इस चिन्ता के खिलाफ भी काम किया जा रहा है. नर्मदा नदी स्वच्छ होगी, तो सबका लाभ होगा. सत्यार्थी ने कहा कि राज्य सरकार ने तय किया है कि नर्मदा के दोनों किनारे वृक्ष लगाये जायें और रेत का अवैध खनन नहीं हो. यह अभियान हजारों साल आगे की सोच रखकर शुरु किया गया है. इस अवसर पर मौजूद लोगों को सत्यार्थी ने संकल्प दिलाया कि नर्मदा किनारे का हर गांव नशामुक्त हो और इन गांवों का हर बच्चा स्कूल जाये. यात्रा के होशंगाबाद जिले में प्रवेश पर प्रभारी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा सहित जन-प्रतिनिधियों, संतों, ग्रामीणों ने नर्मदा सेवा यात्रा की अगवानी की. यात्रा का स्वागत ग्रामीणों ने गाजे-बाजे से किया.