सरकार ने आईओए को निलंबित किया
दिल्ली. खेल मंत्रालय ने दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को भारतीय ओलंपिक संघ का आजीवन अध्यक्ष बनाने पर आज कड़ी कार्रवाई करते हुए इन दोनों की नियुक्ति का फैसला वापस लेने तक इस राष्ट्रीय ओलंपिक संस्था को निलंबित कर दिया.  सरकार ने यह कड़ा फैसला आईओए का कारण बताओ नोटिस का आज शाम पांच बजे की समय सीमा तक ठोस जवाब देने में नाकाम रहने के बाद किया. आईओए ने अपने अध्यक्ष एन रामचंद्रन के देश से बाहर होने के कारण जवाब देने के लिये 15 दिन का समय मांगा था. खेल मंत्री विजय गोयल ने अपने आवास पर कहा कि सरकार गलत कामों को मंजूरी नहीं दे सकती. आईओए को जारी कारण बताओ नोटिस गंभीर था, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया और इसके बजाय 15 दिन का समय मांगा. इसलिए सरकार ने तब तक आईओए का निलंबित करने का फैसला किया है जब तक वह नियुक्तियां रद्द नहीं कर दे. गोयल ने कहा कि निलंबन के दौरान आईओए राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनओसी) के तौर पर सरकार से मिले विशेषाधिकारों का उपयोग नहीं कर पाएगा. इसके साथ ही आईओए को मिलने वाली सभी तरह की वित्तीय या अन्य तरह की सरकारी मदद भी रोक दी जाएगी. मंत्रालय ने इस संबंध में बयान भी जारी किया है. इसमें कहा गया है कि आईओए को कारण बताओ नोटिस का आज शाम पांच बजे तक जवाब देना था. आईओए ने आज कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिये समय सीमा बढ़ाकर 15 जनवरी करने के लिये कहा. उसने कहा कि आईओए अध्यक्ष देश से बाहर हैं और उसे उनसे सलाह मशविरा करना होगा. मंत्रालय ने कहा कि सरकार आईओए के जवाब से संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसने विशेषकर सुरेश कलमाड़ी और अभय चौटाला की अयोग्यता के संबंध कोई ठोस जवाब नहीं दिया. सरकार का मानना है कि आईओए का जवाब केवल समय आगे बढ़ाने की चाल है. गोयल ने कहा कि आईओए ने कलमाड़ी और चौटाला को आजीवन अध्यक्ष नियुक्त करके सुशासन की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है. मंत्री ने कहा कि आईओए ने सुशासन की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है और इसके लिये तुरंत सुधारात्मक कदम उठाये जाने की जरुरत है क्योंकि यह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और आम जन की भावनाओं से जुड़ा मसला है. उन्होंने कहा कि सरकार हालांकि ओलंपिक चार्टर का पूरा सम्मान करती है और वह खेलों की स्वायत्ता की रक्षा के लिये प्रतिबद्ध है लेकिन वह आईओए द्वारा सुशासन और नैतिकता के सिद्वांतों का स्पष्ट उल्लंघन पर मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती है क्योंकि इससे देश की छवि और प्रतिष्ठा जुड़ी है. कलमाड़ी और चौटाला को 27 दिसंबर को चेन्नई में आईओए की वार्षिक आम बैठक में आजीवन अध्यक्ष बनाया गया था जिससे भारतीय खेल समुदाय हैरान और खेल मंत्रालय नाराज था. विवाद बढ़ने के बाद कलमाड़ी ने पेशकश नामंजूर कर दी, लेकिन चौटाला अब भी अड़े हुए हैं. इन दोनों की नियुक्ति पर आईओए के अंदर भी विरोध के स्वर उभरे हैं. हाकी इंडिया के पूर्व प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ (एफआईएच) के नवनियुक्त अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने आज विरोधस्वरुप आईओए के संबद्ध अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. कलमाड़ी 1996 से 2011 तक आईओए अध्यक्ष रहे और 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के संलिप्तता के कारण उन्होंने 10 महीने जेल में भी बिताये, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया. चौटाला दिसंबर 2012 से फरवरी 2014 तक आईओए अध्यक्ष रहे, जबकि राष्ट्रीय ओलंपिक संस्था को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने ऐेसे उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने के कारण निलंबित कर दिया था जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल थे. आईओसी ने बाद में आईओए प्रमुख के तौर पर चौटाला के चुनाव को रद्द कर दिया था.