Bullet train

जापान अन्य बातों के अलावा अपनी अत्यंत तेज गति की बुलेट ट्रेन के लिए प्रसिद्ध रहा है लेकिन कोरोना संकट का ऐसा असर पड़ा कि बुलेट ट्रेन में यात्रियों की संख्या लगातार कम होती चली जा रही है.

जापान अन्य बातों के अलावा अपनी अत्यंत तेज गति की बुलेट ट्रेन के लिए प्रसिद्ध रहा है लेकिन कोरोना संकट का ऐसा असर पड़ा कि बुलेट ट्रेन में यात्रियों की संख्या लगातार कम होती चली जा रही है. पहले लोग समय बचाने के लिए इसे पसंद करते थे. साथ ही यह ट्रेन पर्यटकों के भी आकर्षण का केंद्र थी परंतु अब ईस्ट जेआर की बुलेट ट्रेन के यात्रियों की संख्या अगस्त माह में 74 फीसदी घट गई. ऐसी हालत में जापान को अपनी प्रतिष्ठासूचक बुलेट ट्रेन बचाने के लिए संघर्ष करने की नौबत आ गई है. जापान रेलवे ने किराया कम करने का फैसला किया है ताकि यात्री बढ़ें. सेंट्रल जेआर अब आधा दिन के यात्रा पैकेज की पेशकश कर रहा है. जापान के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या नहीं के बराबर है जबकि वहां सिर्फ रेलवे कर्मचारी और सफाई कर्मी ही अधिक नजर आते हैं. ईस्ट जापान रेलवे कंपनी और वेस्ट जापान रेलवे कंपनी 1987 के रेलवे निजीकरण के फैसले के बाद से सबसे अधिक नुकसान का अनुमान व्यक्त कर रही है. कोरोना रोगियों की बड़ी तादाद की वजह से लोग लंबा ब्रेक लेकर दूर तक घूमना-फिरना नहीं चाहते. पहले इस मौसम में जापान के लोग अपने शहरों से बाहर प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के लिए ट्रेन से दूरदराज के ठिकानों पर जाया करते थे. कोरोना की दहशत से उनके उत्साह पर पानी फिर गया है. रेलवे कंपनियों के शेयर में भी गिरावट आई है. एक अनुमान के अनुसार जापान रेलवे को 418 बिलियन येन का नुकसान हो सकता है. जापान सरकार ने पर्यटन बढ़ाने के उद्देश्य से अंतरदेशीय परिवहन, होटलों में ठहरने तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं में 50 प्रतिशत तक छूट देने की घोषणा कर रखी है परंतु कोई अनुकूल असर होता दिखाई नहीं देता. जब जापान में बुलेट ट्रेन का यह हाल है तो भारत में भी बुलेट ट्रेन योजना पर ग्रहण लगा दिखाई देता है.