Center accused on the issue of appointment of judges, court did not send recommendation only

उच्च न्यायालयों ने इनमें से 214 पदों के लिए कोई सिफारिश ही नहीं भेजी.

    हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में यदि जजों के पद खाली पड़े हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े सहित जस्टिस एसके कौल व जस्टिस सूर्यकांत ने गत 27 मार्च को अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा था कि भारत सरकार देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम से पास किए गए उन 45 नामों को सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं भेज रही है जिन्हें हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है?

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि क्या प्रस्तावित जजों की नियुक्ति पूरी किए बगैर एडहॉक जजों की नियुक्ति का कोई प्रावधान है? जस्टिस कौल ने कहा कि सरकार तो उन 10 नामों पर भी फैसला नहीं कर सकी है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्टों में जज नियुक्त करने की सिफारिश की है. इसके जवाब में केंद्र सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि 26 मार्च तक जजों के 410 पद खाली थे. उच्च न्यायालयों ने इनमें से 214 पदों के लिए कोई सिफारिश ही नहीं भेजी.

    9 हाईकोर्ट ने 5 वर्षों से कोई नाम नहीं भेजा

    कानून मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 9 उच्च न्यायालयों ने वकीलों के कोटे से खाली हुए पदों के लिए 5 वर्ष से कोई सिफारिश नहीं भेजी. ओडिशा हाईकोर्ट ने तो 6 वर्ष बाद भी वकील कोटे (बार कोटा) से जज नियुक्ति की कोई सिफारिश नहीं की. ऐसी ही स्थिति सीनियर जुडीशियल आफिसरों के कोटे (सर्विस कोटा) से हाईकोर्ट जजों के खाली पदों को भरने के लिए नामों की सिफारिश 5-5 वर्षों से नहीं आई. कानून मंत्रालय ने जजों की नियुक्ति में विलंब के लिए सुप्रीम कोर्ट की भूमिका उजागर की और कहा कि पिछले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर हो गए थे लेकिन उनकी रिक्त जगह भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अब तक किसी नाम की सिफारिश नहीं की. तब से सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों के पद खाली हो चुके हैं किंतु कॉलेजियम ने एक भी नाम की सिफारिश नहीं की.

    प्रक्रिया का उल्लंघन

    केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों पर मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के उल्लंघन का आरोप लगाया है. इसके तहत किसी जज का कार्यकाल समाप्त होने के 6 माह पूर्व ही नए जज की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है. इस संबंध में न्यायपालिका और कार्यपालिका (सरकार) के बीच एक लिखित सहमति होती है. सुप्रीम कोर्ट में आखिरी नियुक्ति सितंबर 2019 में हुई थी. तब से जजों के 5 पद खाली हो गए हैं. जिस देश में आबादी की 48 फीसदी महिलाएं हैं, वहां सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल सिर्फ 1 ही महिला न्यायाधीश रह गई हैं.

    लाखों मामले बकाया

    नियुक्तियां नहीं होने से हाईकोर्ट में 411 पद खाली पड़े हैं और 669 जजों के भरोसे हाईकोर्ट चल रहे हैं. देश के उच्च न्यायालयों में 57 लाख तथा सुप्रीम कोर्ट में 67,000 मामले बकाया हैं. पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि न्याय में विलंब होने से लोग पछताते हैं कि अदालत क्यों गए थे. न्यायिक नियुक्तियों में विलंब के लिए केंद्र व सुप्रीम कोर्ट एक दूसरे को दोष दे रहे हैं. ऐसी स्थिति में अगले चीफ जस्टिस एनवी रामन्ना जब पद संभालेंगे तो उन्हें केंद्रीय कानून मंत्रालय के सहयोग से काम करना होगा और न्यायिक सुधारों को आगे बढ़ाना होगा. कोरोना की वजह से अदालतों का कामकाज प्रभावित हुआ है तथा मामलों का बैकलाग बढ़ा है.