शासन की ढिलाई और जनता की लापरवाही, फिर कोरोना की चपेट में महाराष्ट्र

    देश में कोरोना (Coronavirus) का प्रकोप नए सिरे से बढ़ गया है और खास बात यह है कि भारत की आर्थिक राजधानी कहलानेवाली मुंबई समेत महाराष्ट्र (Maharashtra) सबसे ज्यादा प्रभावित है. स्थिति बेकाबू होती चली जा रही है. उम्मीद की जा रही थी कि कोरोना महामारी का एक वर्ष पूरा हो जाने और वैक्सीन आ जाने के साथ ही इस पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया जाएगा परंतु नए सिरे से कोरोना ब्लास्ट हो गया. ऐसे समय जबकि अप्रैल-मई में 10वीं-12वीं परीक्षाएं होने जा रही हैं, यह महामारी अपना उग्र रूप दिखा रही है.

    विद्यार्थी और पालक सहमे हुए हैं कि आगे क्या होगा? राज्य में कहीं पूर्ण तो कहीं आंशिक लॉकडाउन (Lock down)व नाइट कफ्र्यू लगा दिया गया है. महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई और नागपुर में कोरोना केस की संख्या 16,000 को पार कर चुकी है. नागपुर में अब तक 1.64 लाख मरीज मिल चुके हैं. एक-एक दिन में सैकड़ों पाजीटिव मिल रहे है. ऐसा लगता है कि यह वायरस कहीं जानेवाला नहीं है बल्कि अन्य बीमारियों की तरह जीवन का हिस्सा बनकर रह जाएगा. ऐसा नहीं लगता कि यह नष्ट हो पाएगा. जिनकी इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी वे आसानी से इसकी चपेट में आ जाएंगे.

    शासन की ढिलाई और जनता की लापरवाही

    कोरोना के फैलाव को देखते हुए राज्य सरकार कठोर नियंत्रण लगाने की बात अवश्य करती है परंतु वर्तमान स्थितियों को देखते हुए लगता है कि सरकार से कोरोना संभल नहीं रहा है. सरकार सिर्फ लॉकडाउन लागू करने पर जोर दे रही है लेकिन पिछले समय टेस्टिंग व नियम पालन में जो ढीलापन देखा गया वह किसी से छिपा नहीं है. एक ओर शासन की ढिलाई देखी गई तो दूसरी ओर जनता की लापरवाही भी कम नहीं रही. लोगों ने मास्क लगाए बगैर घूमना शुरू किया. कितने ही लोग नाक-मुंह पर ठीक से मास्क लगाने की बजाय सिर्फ गले में लटकाए रहते हैं. कोई यह नहीं सोचता कि एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति और कितने ही लोगों को संक्रमित कर सकता है.

    सरकार ने क्वारंटाइन सेंटर बंद कर लोगों को घर में क्वारंटाइन के लिए कहा लेकिन लोग फिर भी घूमते रहे. जनता का ऐसा बेफिक्र रवैया रहा, मानो कोरोना पूरी तरह समाप्त हो गया. बिना किसी काम बाजार में भीड़ करना, सैर सपाटा करना लोगों को महंगा पड़ा. संक्रमितों की बड़ी तादाद से स्पष्ट हो गया कि महाराष्ट्र कोरोना की दूसरी लहर (सेकंड वेव) को देख रहा है. दिशानिर्देशों का उल्लंघन सड़कों पर साफ नजर आता है. कारों का काफिला और टू व्हीलर पर सैरसपाटा करते लोगों का रवैया ऐसा है, मानो कोरोना का कोई अस्तित्व ही नहीं है. हल्के से लक्षण मालूम होते ही लोगों को तुरंत स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए ताकि वे और उनके परिजन सुरक्षित रहें.

    देश के 70 फीसदी मरीज महाराष्ट्र में

    महाराष्ट्र सरकार का दावा है कि उसने अपनी उपाय योजना से मुंबई के धारावी और वरली जैसे घने इलाकों में कोरोना कंट्रोल कर लिया था लेकिन इन उपाय योजनाओं को सरकार ने अचानक बंद क्यों कर दिया? कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर को लेकर सरकार ने कोई अगली प्लानिंग नहीं की. लोग यही मानते हैं कि सरकार ने अपनी लापरवाही से पूरे राज्य को लोकडाउन में झोंकने का काम किया है.

    आम जनता की मुसीबत

    लाकडाउन से श्रमिक वर्ग, फल-सब्जी बेचनेवाले, आटो रिक्शा व टैक्सी चलानेवालों की मुसीबत हो जाती है. ये ऐसे लोग हैं जो अपनी रोजी-रोटी के लिए बाहर निकलने को मजबूर हैं. इन्हें फिर से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. अर्थव्यवस्था को भी फिर से करारा झटका लगेगा. जब बाजार बंद रहेंगे तो माल की खपत कैसे होगी? मांग नहीं बढ़ने से उत्पादन ठप होगा. कितने ही लोगों के सामने फिर भुखमरी की नौबत आएगी. जैसी विकट स्थिति है, उसमें जनता से संयम बनाए रखने और प्रशासन से तत्परता की उम्मीद की जा सकती है.