जम्मू-कश्मीर परिसीमन पर PDP ने दोटूक सुनाई

    जम्मू-कश्मीर के परिसीमन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का रुख असहयोगपूर्ण है. उन्हें इसमें साजिश नजर आती है. पीडीपी चुनाव क्षेत्रों की नए सिरे से रचना या परिसीमन कार्यवाही के परिणाम को व्यापक रूप से पूर्वनियोजित मान रही है. उसने शंका जताई है कि परिसीमन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है. यह अशक्तिकरण की समूची प्रक्रिया का हिस्सा है जिसे केंद्र सरकार ने शुरू किया है. पीडीपी के महासचिव गुलाम नबी हंजूरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी ने परिसीमन की कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया है और वह ऐसी किसी भी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेगी जिससे कश्मीरियों के हित प्रभावित हो सकते हैं. हंजूरा ने परिसीमन आयोग की प्रमुख अवकाशप्राप्त जज रंजना प्रकाश देसाई को लिखे पत्र में पीडीपी के रुख को दोहराया और साथ ही यह भी कहा कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के संबंध में किए गए संवैधानिक परिवर्तन अवैध और असंवैधानिक थे, जिनमें विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 व 35 (ए) को रद्द कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि पीडीपी मानती है कि परिसीमन आयोग के पास संवैधानिक और कानूनी जनादेश का अभाव है व इसके अस्तित्व तथा उद्देश्यों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को कई सवालों के घेरे में छोड़ दिया है.

    पहले राज्य का दर्जा दें

    नेशनल कांफ्रेंस व कांग्रेस ने श्रीनगर दौरे पर आए परिसीमन आयोग से भेंट की और कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण का काम स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए ताकि राज्य की एकता-अखंडता सुरक्षित रहे. दोनों पार्टियों ने आयोग को अलग-अलग प्रतिवेदन दिए और मांग की कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जाए और उसके बाद चुनाव कराए जाएं. सीपीएम ने परिसीमन के संवैधानिक पहलू और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को कानूनी चुनौती का जिक्र किया और कहा कि इस कानून की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक परिसीमन की कार्यवाही को रोका जाए. जो कानून अदालत के विचाराधीन है, उसे फैसला आने से पहले लागू करना अनुचित होगा. नेशनल कांफ्रेंस ने दलील दी कि विधानसभा चुनाव क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण या परिसीमन जम्मू-कश्मीर राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है. जम्मू-कश्मीर का जो संविधान है, उसके 47वें अनुच्छेद के द्वितीय प्रावधान में इसका उल्लेख है.

    महबूबा पर दबाव

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की मां को मनी लांड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए 14 जुलाई को अपने सामने तलब किया है. महबूबा ने कहा कि यह राजनीतिक विरोधियों को धमकाने का प्रयास है. वे वरिष्ठ नागरिकों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. अज्ञात आरोपों को लेकर उनकी मां को सम्मन भेजा गया है.