Remove problems from digital banking

गत 21 नवंबर को प्राइमरी डेटा सेंटर में बिजली गुल हो जाने से इस बैंक की भुगतान प्रणाली व इंटरनेट बैंकिंग प्रभावित हुई.

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने एचडीएफसी बैंक को निर्देश दिया कि जब तक वह डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की खामियां दूर नहीं कर लेता, तब तक डिजिटल बिजनेस रोक दे और ग्राहकों को नए क्रेडिट कार्ड जारी न करे. यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि एचडीएफसी की इंटरनेट बैंकिंग में कुछ कठिनाइयां तथा अवरोध आ रहे थे. पिछले लगभग 2 साल से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि मोबाइल बैंकिंग और पेमेंट यूटिलिटी में भी दिक्कतें बनी हुई हैं. गत 21 नवंबर को प्राइमरी डेटा सेंटर में बिजली गुल हो जाने से इस बैंक की भुगतान प्रणाली व इंटरनेट बैंकिंग प्रभावित हुई. रिजर्व बैंक का कहना सही है कि डिजिटल बैंकिंग वाले ग्राहकों को घंटों परेशानी में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती. पिछले दिनों भारतीय स्टेट बैंक का योनो ऐप भी एक दिन से ज्यादा तकनीकी रूप से बिगड़ा रहा, जिस कारण उपयोगकर्ता लॉग-इन व ट्रांजैक्शन नहीं कर पाए. हाल के महीनों में अन्य बैंकों में भी यही हालत देखी गई. कहीं डिपॉजिट मशीन रकम स्वीकार नहीं कर रही थी तो कहीं सर्वर बैठ जाने से पासबुक अपडेट करने वाली मशीन काम नहीं कर रही थी. इससे ग्राहकों को काफी दिक्कत हुई. यह बात सही है कि पिछले 8 महीनों से कोरोना संकट की वजह से डिजिटल ट्रांजैक्शन में काफी वृद्धि हुई है. संक्रमण के डर से लोग बैंक जाने से कतराते हैं और डिजिटल लेन-देन करते हैं. इस वर्ष अप्रैल से नवंबर के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन में लगभग 90 प्रतिशत वृद्धि हुई. जनता में जागृति आने के बाद नेटबैंकिंग बढ़ी है. ऐसा अनुमान है कि भारत में 2023 तक 270.7 अरब डॉलर का नकद लेन-देन कैश की बजाय कार्ड से होगा तथा 2030 आते तक 856.6 अरब डॉलर का डिजिटल भुगतान होने लगेगा. इसे देखते हुए बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं को अपना आईटी सिस्टम बेहतर बनाना या अपग्रेड करना होगा, तभी वे ग्राहकों की उम्मीद पर खरे उतरेंगे. रिजर्व बैंक को भी विचार करना चाहिए कि सिर्फ एक बैंक पर कार्रवाई करने की बजाय समस्या को समग्र रूप से देखे और सभी बैंकों से अपने आईटी सिस्टम सुधारने और इसके लिए पर्याप्त निवेश करने को कहे.