Uddhav's words, CM does not deserve prestige

शिवसेना और बीजेपी के बीच कटुता इतनी बढ़ गई है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आपा खो बैठे हैं.

शिवसेना और बीजेपी के बीच कटुता इतनी बढ़ गई है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आपा खो बैठे हैं. इस उच्च पद पर आसीन नेता से संयम रखते हुए नपी-तुली व स्तरीय भाषा बोलने की सहज अपेक्षा रखी जाती है परंतु उद्धव ठाकरे न केवल अत्यंत उत्तेजित हो उठे हैं अपितु केंद्र की बीजेपी नेतृत्ववाली एनडीए सरकार और उसकी जांच एजेंसियों को खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं. पहले तो अभिनेता सुशांतसिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मुद्दे पर और फिर कंगना रनौत का ऑफिस तोड़े जाने को लेकर शिवसेना व बीजेपी के बीच विवाद देखा गया, अब शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक की ईडी द्वारा जांच से दोनों पार्टियों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया. एक समय था जब हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी-शिवसेना के बीच सहयोग था और राज्य में उनकी युति सरकार सत्ता में रही लेकिन शिवसेना की मानसिकता हमेशा यही रही कि मोदी केंद्र में सरकार संभालें और महाराष्ट्र को शिवसेना के लिए छोड़ दें. जब शिवसेना को अपना मकसद पूरा होता नजर नहीं आया तो उसने एनसीपी और कांग्रेस जैसी सेक्यूलर पार्टियों की मदद लेकर सरकार बना ली और महाराष्ट्र में बीजेपी को विपक्ष में रहने को विवश कर दिया.

इतना भड़कने की क्या जरूरत थी

हाल ही में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं शांत हूं, संयमी हूं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नामर्द हूं. मैं सीबीआई और ईडी से नहीं डरता हूं. महाराष्ट्र में सीबीआई की एंट्री पर बैन लगाने के मामले में उन्होंने कहा कि जब केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग होने लगे तो नकेल कसनी ही पड़ती है. हमारे लोगों के परिजनों पर हमले शुरू हैं. बदले की भावना ही रखनी है तो तुम एक बदला लो, हम 10 लेंगे. आप दूध के धुले नहीं हो. उद्धव ठाकरे ने नाराजगी से कहा कि महाराष्ट्र ने मरी हुई मां का दूध नहीं पिया है. हम बाघ की संतान हैं. कोई भी महाराष्ट्र के आड़े आएगा या दबाने की कोशिश करेगा तो क्या होगा, इसका इतिहास में उदाहरण है. आपके पास प्रतिशोध चक्र है तो हमारे पास सुदर्शन चक्र है. उसे हम पीछे लगा सकते हैं. सुशांतसिंह राजपूत प्रकरण में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के बीच चले घमासान पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें लाश पर रखे मक्खन को बेचने की जरूरत पड़ती है. यह विकृति से भी गंदी राजनीति है.

देवेंद्र का जवाबी वार

विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के इतिहास में इस तरह से धमकानेवाले मुख्यमंत्री को हमने आज तक नहीं देखा है. उद्धव ठाकरे ने अपने इंटरव्यू में और दशहरा रैली में जिस तरह की भाषा और धमकियों का इस्तेमाल किया है वह सीएम पद पर आसीन किसी नेता को शोभा नहीं देता. हमें आशा थी कि महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार का एक वर्ष पूरा होने पर मुख्यमंत्री जनता के लिए कुछ कहेंगे लेकिन उन्होंने सिर्फ धमकानेवाले बयान दिए हैं. देवेंद्र ने कहा कि महाराष्ट्र में अघोषित आपातकाल की स्थिति है. सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री कंगना रनौत और पत्रकार अर्नब गोस्वामी के मामले में राज्य सरकार के खिलाफ फैसले दिए हैं, यह सरकार के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है. शिवसेना ने पीएम मोदी के नाम पर जनता से वोट मांगे थे लेकिन बाद में सरकार बनाने के लिए किसी और से हाथ मिला लिया. फडणवीस ने कहा कि सरकार ने लोगों के साथ विश्वासघात किया है. हम लोगों ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं की है लेकिन हमारा मानना है कि राज्य में संवैधानिक ब्रेकडाउन है.

कमानें खिंच गई हैं

इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से जाहिर है कि शिवसेना और बीजेपी के बीच तनातनी बहुत ज्यादा बढ़ गई है. कमानें खिंच गई हैं. बीजेपी मानती है कि उद्धव सरकार सभी मोर्चो पर विफल है और बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को रोकने का काम कर रही है. देवेंद्र का आरोप है कि उन्होंने कोरोना महामारी को लेकर मुख्यमंत्री को 100 से ज्यादा पत्र लिखे लेकिन उन्हें किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला.