पांजरापोल गोरक्षण संस्था में हुरडा महोत्सव का शुभारंभ

  • हुरडा के साथ गौसेवा का अवसर

अहमदनगर. विश्व की मानवजाति ने कई बार मानव निर्मित और प्राकृतिक संकटों का मुकाबला किया है। लेकिन मौजूदा स्थिति में कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को परेशान किया है। लाकडाउन की स्थिति में काफी प्रतिकूल स्थिति होने के बावजूद पांजरापोल गोरक्षण संस्था ने गोरक्षण और गौसेवा का अपना कार्य अविरत रूप से शुरू रखा है। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी गुलाबी ठंड का आगमन होने के दौरान पांजकापोल संस्था ने हुरडा महोत्सव की तैयारी पूरी कर ली है। कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि में आवश्यक सभी नियमों का सख्ती से पालन करते हुए पांजरापोल संस्था में हुरडा महोत्सव का शुभारंभ किया गया। यह जानकारी पांजरापोल संस्था के अध्यक्ष हस्मीमल मुनोत ने दी है।

विभिन्न तरह के जायकेदार डिश उपलब्ध 

उपाध्यक्ष सीए रमेश फिरोदिया, एड. शरद पल्लोड, सेक्रेटरी किशोर मुनोत, संचालक संजय बोरा, नंदलाल मिणियार, नरेंद्र लोहाडे, विक्रम फिरोदिया, विजय कोथिंबिरे, प्रवीण गांधी, योगेश चंगेडिया, जय कुमार शिंग वी, मैनेजर महेश मुनोत, राजकुमार पितले आदि उपस्थित थे। उपाध्यक्ष फिरोदिया के हाथों हुरडा के लिए भट्टी प्रज्वलित कर हुरडा महोत्सव का शुभारंभ किया गया।

सेक्रेटरी किशोर मुनोत ने बताया कि संस्था ने उचित नियोजन कर दूधमोगरा हुरडा ज्वार की बुआई की है। हुरडा के साथ चटनी, रेवडी, गुडीसेव, दही, चाय, काफी, स्वीट कार्न भी उपलब्ध किए गए हैं। उसी तरह महाराष्ट्रीयन पध्दति का भोजन भी पांजरापोल संस्था ने उपलब्ध कराया है। इसमें ज्वार-बाजरा की रोटी, बैंगन का भरता, बैंगन की सब्जी, तरपरा चटनी, जैसी पूरी महाराष्ट्रीयन पध्दति के भोजन को नागरिक अपनी पहली पसंद करते हैं। उसी तरह इस वर्ष संस्था ने नाश्ता के लिए भजिया, वडा-पाव, मिसल,पोहा, उपमा और भोजन के लिए खास राजस्थानी दालबाटी भी उपलब्ध कराई है।इस वर्ष कोरोना महमारी के मद्देनजर बुकिंग करना अनिवार्य किया गया है।