किसान आत्महत्या के 16 मामले पात्र, तीन मामले सहायता के लिए अपात्र

    • सात मामलों की दोबारा होगी जांच

    अकोला. जिला स्तरीय समिति ने किसान आत्महत्या के तीन मामलों को इस आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया है कि वे मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं तथा सात मामलों में दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं. जिला स्तरीय समिति की बैठक में 16 मामलों को पात्र घोषित किया गया है. फसल न होने, बकाया ऋण आदि के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के मामलों को सरकारी सहायता के लिए पात्र घोषित किया गया है.

    प्रकृति की अनियमितता के कारण जिले में हर साल कृषि उपज का उत्पादन कम होता जाता है. नतीजतन, प्राप्त आय से खेती और बुवाई की लागत नहीं निकल पाती है. लगातार फसल न होने तथा निजी स्वरूप में या बैंकों से लिए गए ऋणों का किसान भुगतान किसान नहीं कर पा रहे हैं. चूंकि खेती की लागत उत्पादन की लागत से अधिक है, किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने की सोचता है. सरकार आत्महत्या करने वाले किसान परिवार की मदद करती है.

    इस बीच, आत्महत्या करने वाले किसान सरकारी सहायता के पात्र हैं या नहीं, यह तय करने के लिए जिला स्तरीय समिति की बैठक हुई. इस बैठक में कुल 26 मामले रखे गए. इनमें से 16 मामलों को सहायता के लिए पात्र घोषित किया गया और तीन मामलों को अपात्र घोषित किया गया. साथ ही 7 मामलों की दोबारा जांच के आदेश दिए गए. बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी जीतेंद्र पापलकर ने की और इसमें समिति के सदस्य, सचिव और अन्य सदस्य शामिल हुए.