प्रतिकारात्मक  तस्वीर 
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    अकोट. अतिरिक्त व सत्र न्यायाधीश मनीष गणोरकर ने तुषार पुंडकर की हत्या के आरोपी पवन सेदानी (38) को पहली बार वर्तमान अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया है. लगभग एक साल पहले 26 मार्च 2020 को आरोपी को गिरफ्तार किया गया था. इस हत्याकांड प्रकरण में आरोपी अकोला की जेल में बंद है. इस प्रकरण में महाराष्ट्र सरकार ने उज्ज्वल निकम को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया है.

    इस जमानत प्रकरण में सरकारी वकील अजीत देशमुख ने उज्ज्वल निकम के मार्गदर्शन में अदालत में एक लिखित जवाब दायर किया और तर्क दिया कि प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता तुषार पुंडकर की 21 फरवरी 2020 को पिछले साल लगभग 10 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

    आरोपी पवन सेदानी ने इंदौर (मध्य प्रदेश) में अपने रिश्तेदार और इस प्रकरण का आरोपी निखिल सेदानी से संपर्क किया और निखिल ने इसी प्रकरण का आरोपी शाहबाज इस्माइल खान सेंधवा मध्य प्रदेश में बंदूक और गोला-बारूद की अवैध आपूर्ति करने वाले के पास से एक बंदूक, अग्नि शस्त्र और जिंदा कारतूस आरोपी पवन सेदानी को एक लाख रुपए में दिए. जांच में निष्कर्ष निकाला गया है, बैलिस्टिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मृतक तुषार पुंडकर के शरीर से निकाली गई गोली आरोपी शाहबाज खान द्वारा आपूर्ति की गई बन्दूक से चलाई गई थी.

    इसी तरह आरोपी पवन ने अपने साथियों के साथ मिलकर तुषार पुंडकर की हत्या की साजिश रची और साजिश पूरी की. इसके लिए आरोपी पवन सेदानी ने अपने साथियों को आरोपी अल्पेश दुधे व श्याम नाठे को 30 लाख रुपये और मोटार साइकिल देने के लिए भी सहमत था, साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत आरोपी पवन सेदानी द्वारा दिए गए कबूल नामे में 31 मार्च, 2020 को न्यायाधिकरण के समक्ष एक अतिरिक्त बन्दूक, कारतूस और एक्टिवा स्कूटर नंबर एमएच 30 एक्यू 7270 जब्त की गई थी.

    शाहबाज इस्माइल खान जिसने अवैध रूप से बंदूक और कारतूस दी थी, वह मध्य प्रदेश का अपराधी है. जांच से यह भी निष्कर्ष निकला कि आरोपी पवन सेदानी प्रकरण के अन्य आरोपियों के संपर्क में था.

    – आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत

     

    इस प्रकरण के अलावा अन्य प्रकरण में आरोपी पवन सेदानी के खिलाफ मामला प्रलंबित हैं. इसी तरह सरकारी वकील अजीत देशमुख ने अदालत में बहस करते हुए अनुरोध किया कि अपराध एक गंभीर प्रकृति का था और तुषार को एक पूर्व निर्धारित घटनास्थल पर मार दिया गया था. कानून में इस अपराध के लिए आजीवन कारावास और मौत की सजा का प्रावधान है. यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह गवाहों पर दबाव डाल सकता है, या यहाँ तक कि गवाहों को नुकसान पहुंचा सकता है. सरकार आरोपियों के खिलाफ प्रकरण को तेज करने के लिए तैयार है. आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत हैं. यदि गोलियों को उपलब्ध नहीं कराया गया होता, तो हत्या नहीं होती. इसलिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी पवन सेदानी की जमानत याचिका को अंततः खारिज कर दिया गया.