Representational Pic
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    • कृषि डिग्री के 1,168 छात्रों के सामने सवालिया निशान!

    अकोला. कृषि तंत्र निकेतन का कोर्स पूरा कर चुके 1,168 छात्र कृषि के डिग्री कोर्स में दाखिले के सवाल का सामना कर रहे हैं. छात्रों के साथ अन्याय करने वाली महाविकास अघाड़ी सरकार के खिलाफ भाजयुमो की ओर से कृषि विश्वविद्यालय के सामने बैठा आंदोलन किया गया. यदि विद्यार्थियों पर अन्याय होता है तो महाराष्ट्र में बड़ा आंदोलन किया जाएगा और उसकी जिम्मेदारी सरकार की रहेगी यह इशारा जिला भाजपाध्यक्ष, विधायक रणधीर सावरकर ने दिया है.

    डा.पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत इस साल 1,168 छात्रों ने कृषि तंत्र निकेतन का कोर्स पूरा किया है. बीएससी कृषि डिग्री पाठ्यक्रम के दूसरे वर्ष में इन छात्रों को प्रवेश देने से विश्वविद्यालय के इनकार ने मुख्य रूप से विदर्भ के 1,168 छात्रों के शैक्षिक भविष्य को खतरे में डाल दिया है.

    भाजयुमो ने इन छात्रों के प्रवेश के लिए कृषि विश्वविद्यालय में आंदोलन किया. भाजयुमो के आंदोलन में जिला भाजपाध्यक्ष, विधायक रणधीर सावरकर ने वंचित विद्यार्थियों के न्याय के लिए पहल की है और डा.पंदेकृवि के उप कुलपति डा.विलास भाले से आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों के समक्ष चर्चा की.

    उन्होंने छात्रों के किसी भी परिस्थिति में डिग्री कोर्स में प्रवेश से वंचित न रहने का आग्रह किया. राज्य में कृषि विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य शैक्षणिक विश्वविद्यालयों को भी कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ट्यूशन फीस में रियायत दी गई है, फिर कृषि विश्वविद्यालयों के साथ गठबंधन सरकार को ऐसा नुकसान नहीं करना चाहिए. राज्य के चारों कृषि विश्वविद्यालयों के छात्रों की ट्यूशन फीस में तत्काल राहत के लिए आवश्यक प्रस्ताव सरकार को भेजे जाए, यह निर्देश उप कुलपति डा.विलास भाले को दिए हैं.

    इस आंदोलन में भाजयुमो प्रदेश सचिव सोपान कनेरकर, अंबादास उमाले, जयंत मसने, भाजयुमो जिलाध्यक्ष सचिन देशमुख, किरण अवताड़े, अभिजीत बांगर, नीलेश काकड़, अमोल पिंपले, सुयोग देशमुख, उज्वल बामनेट, अक्षय जोशी, राजेश निनाले, हमेंद्र सुनारीवाल, टोनी जयराज, अभिजीत भगत, अविनाश जाधव, नितिन राउत, अनूप गोसावी, ऋषिकेश अंजनकर, अमोल तालोकर, मंगेश झिने, शिवम बलापुरकर आदि शामिल थे. 

    राज्य में 6,420 विद्यार्थी

    प्रदेश में चारों कृषि विश्वविद्यालयों के अंतर्गत कृषि तंत्रनिकेतन की पढ़ाई पूरी करने वाले करीब 6,420 छात्र हैं और इन सभी छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में है. सरकार को सहानुभूति रखने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि छात्रों को नुकसान न पहुंचे.