SOP to reopen schools in Gujarat soon after Diwali

  • सरकारी सूचनाओं का पालन करते हुए शुरू होंगी शालाएं

अकोला. अकोला के जिलाधिकारी जीतेंद्र पापलकर ने जिले के प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर कक्षा 9वीं से 12वीं तक की सभी सरकारी, निजी शालाओं की कक्षा, वसतीगृह, आश्रम शाला सोमवार दि.23 नवंबर से शुरू करने के आदेश जारी किए हैं. शाला शुरू करने से पहले शाला प्रबंधन समिति व प्रधानाध्यापक द्वारा सुरक्षा विषयक उपाय योजनाओं पर अमल किया जाना जरूरी है.

कोरोना वायरस को देखते हुए शाला में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के हाथ धोने की सुविधा थर्मामीटर, थर्मल स्कैनर गन, पल्स ऑक्सीमीटर इसी तरह जंतुनाशक, सैनिटाइजर, साबुन, पानी आदि की भी व्यवस्था की जानी चाहिए. यदि किसी स्कूल में क्वारंटाइन सेंटर होगा तो उसे अन्य स्थान पर स्थानंतरित किया जाना चाहिए. यदि संभव नहीं है तो शाला खुले क्षेत्र में आयोजित की जानी चाहिए. कक्षा तथा स्टाफ रूम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाना चाहिए. कक्षा में 1 बेंच पर सिर्फ एक विद्यार्थी की बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए.

इसी तरह शाला में थूकने पर बंदी पर अमल होना चाहिए. बाहर के क्षेत्र में कतार में खड़े रहने के लिए कम से कम 6 फिट का अंतर होना चाहिए. किसी भी स्थान पर भीड़ नहीं होनी चाहिए. विद्यार्थी, पालक, शिक्षक व समाज के सभी सदस्यों को कोविड 19 से संबंध में जागरूक करना जरूरी है. जागरूकता निर्माण करने के लिए शाला प्रबंधन समिति ने पॉम्पलेट व सार्वजनिक घोषणाओं का उपयोग करना चाहिए.

कोविड के लक्षण होने पर शाला में जाना टालना चाहिए और संबंधित अस्पताल से संपर्क करना चाहिए. सभी के लिए मास्क का उपयोग बहुत जरूरी है. यदि कोई बच्चा बीमार है तो पालक उसे शाला में न भेजें वह घर में भी अपनी पढ़ाई कर सकता है. शाला के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी की कोविड जांच जरूरी है जांच के बाद प्रमाणपत्र शाला में प्रस्तुत करना चाहिए. और सभी ने कोविड संबंधि सूचनाओं का पालन करना चाहिए. इसके अलावा भी कई सूचनाएं शालाओं को दी गई हैं जिनका पालन जरूरी है. 

बहुत से पालक इच्छुक नहीं हैं बच्चों को शालाओं में भेजने के

आज शहर में बातचीत के दौरान पता चला कि कोविड के प्रसार को देखते हुए बहुत से पालक अपने बच्चों को शालाओं में भेजने के बिलकुल इच्छुक नहीं है. बहुत से पालक चाहते हैं कि जब तक कोरोना वायरस का आतंक पूरी तरह से समाप्त नहीं हो जाता तब तक वे अपने बच्चों को शालाओं में नहीं भेजेंगे. प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ शालाओं द्वारा पालकों को कहा गया है कि पालक अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को शाला में भेजें. बहुत से पालक तब तक शालाओं में बच्चों को नहीं भेजेंगे जब तक कोरोना वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता या वैक्ससिन नहीं आ जाती. 

जिला प्रशासन का ध्यान रहेगा शालाओं की तरफ- प्रा.संजय खड़से

जिलाधिकारी जीतेंद्र पापलकर के आदेशानुसार 23 नवंबर से 9वीं से लेकर 12वीं तक की शालाएं शुरू हो रही हैं. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने को लेकर जो सूचनाएं सरकार द्वारा जारी की गई हैं उन सूचनाओं का पालन करते हुए शालाओं को शुरू करने की अनुमति दी गई हैं. निवासी उप जिलाधिकारी प्रा.संजय खड़से ने बातचीत के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि जिला प्रशासन का ध्यान शालाओं की ओर रहेगा कि शालाओं में सरकारी आदेशों का पालन किया जा रहा है या नहीं. इस ओर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है.