अमरावती संभाग में कुपोषित बालकों का बढ़ता प्रमाण चिंताजनक

    • विभाग में सैम श्रेणीं में 6645, मैम श्रेणी में 29918 बालक

    अकोला. सरकार द्वारा हमेशा कहा जाता है कि, सभी आदिवासी बाहुल क्षेत्रों में सक्षम तरीके से काम किया जा रहा है. फिर भी अमरावती संभाग के पांच जिलों मे कुपोषित बालकों की सैम तथा मैम श्रेणी का प्रमाण बढता जा रहा है, यह चिंताजनक बात है. विश्व स्वास्थ्य संघटन तथा युनिसेफ के निरीक्षण के अनुसार मैम तथा सैम के कारण 0 से 5 उम्र के बालकों को मौत का खतरा 10 गुना से अधिक रहता है.

    इस पृष्ठभूमिपर विचार करनेपर पिछले 5 वर्षों के काल मे सन 2016-17 से सन 2020-21 तक बुलढाना जिले में सर्वाधिक 2177 कुपोषित बच्चे पाए गए. उसके बात अमरावती जिले में 2112, यवतमाल जिले में 1076, अकोला जिले मे 866 तथा वाशिम जिले मे सबसे कम 414 अति तीव्र बच्चे पाए गए है.

    इस तरह इन पांचो जिलो मे करीब 6645 कुपोषणग्रस्त सैम बच्चे पाए गए हैं. दूसरी ओर कुपोषणग्रस्त मैम बालकों का विचार किया गया उसमे सन 2016-17 सन 2020-21 तक अमरावती जिले मे सर्वाधिक 11519 मैम श्रेणी के बच्चे पाए गए.

    उसी तरह बुलडाना जिले मे 7520, यवतमाल जिले मे 4601, वाशिम जिले में 3149,अकोला जिले मे 3129 कुपोषणग्रस्त बच्चे पाए गए. इस तरह सैम बालकों की तुलना मे पांचो जिलो मे मैम बालकों की संख्या अधिक यानि 29918 पाई गई है.

    अंधश्रद्धा के कारण कुपोषण बढ़ा

    सैम तथा मैम श्रेणी के बालकों को समय समयपर पोषक आहार देकर उनको उपर की श्रेणी में लाने के लिए सरकार तथा स्वास्थ्य विभागद्वारा भरपूर प्रयास किया जाता है परंतु अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में वहां के आदिवासीयोंपर अंधश्रद्धा के साए के कारण कुपोषण का प्रमाण बढा है. कुपोषित बच्चो का जन्म ना हो इसके लिए भी माता पिता द्वारा ध्यान नही दिया जाता है. देखा जाए तो इसके लिए गर्भवती महिला के आहार से ही सुरुवात कि जानी चाहिए.

    यदि गर्भवती महिला को पोषक आहार दिया गया तो कुपोषित बच्चे पैदा नही होंगे. प्राप्त जानकारी के अनुसार,गर्भ से लेकर 2 वर्ष की उम्रतक कुपोषण का विशेष धोखा रहता है. इसके लिए गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार देने के साथ साथ विशेष ध्यान दिया जाना जरुरी रहता है.

    इसी तरह बच्चे के जन्म के बाद भी महिलाओं को पोषक आहार तथा देखरेख की बहोत जरुरत रहती है लेकिन इस ओर ध्यान न दिए जाने के कारण कुपोषण बढ रहा है. बच्चे के जन्म के बाद 1 घंटे के अंदर बच्चे को माता ने अपना   दूध पिलाना चाहिए. यह दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम रहता है. इसके कारण बच्चे को कई बिमारीयों से राहत मिलती है.

    महिलाओं की तरफ ध्यान देना जरुरी

    बच्चा पैदा होने के बाद मां ने करीब छह माह तक बच्चे को अपना दूध पिलाना चाहिए उसके बाद उसको पोषक आहार दिया जा सकता है. इसी तरह गर्भवती महिलाओं के आराम की ओर भी पुरा ध्यान दिया जाना जरुरी है. उसे भोजन मे हरी सब्जियां, दाल, अंडे, दूध, फल और अन्य पोषक सामग्री भरपूर प्रमाण मे देनी चाहिए. यदि इस ओर ध्यान दिया गया तो कुपोषित बच्चों की संख्या कम हो सकती है.