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  • संतरा मोसंबी के दोनों बहार को बीमा कवच दें
  • फल उत्पादकों की मांग

अकोट. विदर्भ में विशेषतः अकोट, अंजनगांव, अचलपुर, चांदूर बाजार, वरुड, मोर्शी, काटोल, नागपुर तक का परिसर यह संतरा मोसंबी के लिए प्रसिद्ध है. इस परिसर में 225 लाख हेक्टेयर पर संतरा तथा 1 लाख हेक्टेयर पर मोसंबी की बाग है. अंबिया और मृग बहार यह साल में 2 बार यह फसल लिए जाते है. लेकिन प्राकृतिक आपदा से इस बाग का बड़ा नुकसान होता है. इस नुकसान भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फलबाग बीमा योजना के अंतर्गत बागाईतदार किसानों को बीमा कवच होने से राहत मिलने से फिर भी इस वर्ष संतरा व मोसंबी में से एक ही बहार का बीमा निकाला जा सकेगा.

इस संबंध के बीमा कंपनी के आदेश से इस फलबाग उत्पादकों पर बड़ा अन्याय होने से किसानों ने तीव्र नाराजी व्यक्त की है. प्राकृतिक आपदा में किसानों को नुकसान भरपाई मिले इस उद्देश्य को ही हटाकर बीमा कंपनी ने अन्यायकारी आदेश निकालकर केवल एक ही बहार के लिए बीमा कवच देने से यह फल बागाईतदारों पर बड़ा अन्याय है. वास्तविक 2019-20 तक संतरा मोसंबी के दोनों बहार के लिए बीमा निकाला जा सकता था. लेकिन इस वर्ष बीमा कंपनी के आदेश के अनुसार एक ही बहार के लिए बीमा निकाला जा सकेगा. जिससे दूसरे बहार के लिए नुकसान भरपाई से फल उत्पादक वंचित रहेंगे.

खरीफ फसल के लिए मूंग, उड़द व सोयाबीन का बीमा व उसके बाद गेहूं व चना फसल के लिए बीमा निकाला जा सकता है. तो संतरा उत्पादकों को इसी नियम के अनुसार 2 बहार के लिए बीमा कवच अत्यावश्यक होते हुए फलबाग किसानों पर बड़ा अन्याय कर नुकसान भरपाई से वंचित रखने का षडयंत्र दिखाई दे रहा है. इस निर्णय के विरोध में तीव्र नाराजी व्यक्त हो रही है. 

संतरा व मोसंबी फसल की अंबिया व मृग ऐसे दोनों बहार के लिए फसल बीमा कवच देने की मांग जिला बैंक के पूर्व अध्यक्ष तथा वरिष्ठ सहकार नेता रमेश हिंगणकर ने सरकार की ओर की है. बीमा कंपनी ने एक बहार के लिए बीमा निकालने का अन्यायकारक आदेश वापिस लेकर दोनों बहार के लिए बीमा निकालने का सुधारित आदेश निकाले व किसानों का अन्याय दूर कर राहत देने की मांग का निवेदन मुख्यमंत्री उद्वव ठाकरे, उप मुख्यमंत्री अजीत पवार, कृषि मंत्री दादाजी भुसे के साथ विरोधी पार्टी नेता देवेंद्र फडणविस, विधायक व सांसद आदि को भेजा है.