अकोला जिला परिषद की कई योजनाओं में अनियमितताएं

  • सीईओ की ओर शिकायत दर्ज कर जांच व कार्रवाई की मांग

अकोला. अकोला जिला परिषद यह विविध कारणों को लेकर चर्चा में रहती है. वर्तमान कोरोना संकट के समय भी पिछड़ावर्गीय बस्ती सुधार योजना और दुधारु मवेशियों के वितरण में अनियमितताएं उजागर होने से खलबली मच गयी है. इस बीच इन प्रकरणों की शिकायतें जि.प. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर की गयी है. जांच कर संबंधित दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की गयी है.

अनु.जाति व नवबौद्ध घटक विकास योजना के अंतर्गत सरकारी नियमों को ताक पर रखते हुए अधिक निधि वितरित किए जाने का आरोप जि.प. में शिवसेना के गट नेता गोपाल दातकर ने किया है. इस संदर्भ में सीईओ की ओर सबूतों के साथ शिकायत दर्ज की गयी है.

गोपाल दातकर का दावा है कि कृति प्रारुप और मंजूर कार्यों में काफी अंतर है. इसके लिए उन्होंने कुछ कागजात भी प्रस्तुत किए हैं. फलस्वरुप कृति प्रारुप को लेकर सत्ताधारी वंचित बहुजन आघाड़ी और विरोधी गुटों में संघर्ष के आसार दिखाई दे रहे हैं. जि.प. के समाज कल्याण विभाग द्वारा बस्ती सुधार योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपयों के कार्य प्रस्तावित किए गए. लेकिन प्रतिवर्ष यह कार्य समयावधि में शुरु नहीं किए जाने का अनुभव है.

अनु.जाति व नौबौद्ध घटक विकास योजना के अंतर्गत कृति प्रारुप के 70 प्रतिशत कार्य बस्तियों में मंजूर नहीं किए गए. यह शिकायत भी गोपाल दातकर ने दर्ज की है. प्रकरण की पुर्नजांच कर फिर से नियोजन करने की मांग उन्होंने की है. मंजूर कृति प्रारुप में जलापूर्ति, समाज मंदिर, रास्ते व नालियों के निर्माण कार्यों का उल्लेख है लेकिन केवल रास्तों का निर्माण कार्य मंजूर किया गया है. इसके लिए गांव की सूची भी प्रस्तुत की गयी है. 

दुधारु मवेशियों के वितरण में अनियमितता
इस बीच विशेष घटक योजना के अंतर्गत चलाई जा रही दुधारु मवेशी वितरण योजना में भी अनियमितताओं को देखकर जांच समिति गठित किए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है. इस योजना में दर्ज की गयी शिकायत पर सत्ताधारी वंचित आघाड़ी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कुछ पदाधिकारियों के साथ चर्चा कर कार्रवाई करने के आदेश दिये जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है.

जि.प. के पशु संवर्धन विभाग द्वारा लाभार्थियों को दुधारु मवेशियों का वितरण किया जाता है. कुछ वर्षों पूर्व इस योजना के अंतर्गत वितरण किया गया लेकिन यह प्रक्रिया केवल कागजातों पर चलाए जाने का आरोप होने से जि.प. प्रशासन द्वारा जांच समिति गठित की गयी है. इसके पूर्व पंचायत राज समिति के दौरे के समय दुधारु मवेशियों के वितरण की प्रक्रिया के संदर्भ में अनियमितता पर चर्चा की गयी थी.

लाभार्थियों को मवेशी न मिलने की शिकायतें दी गयी थी और कहीं पर भी मवेशियों के लिए गोठे दिखाई नहीं दिये लेकिन पशुधन विकास विभाग के अनुसार दापुरी में 8 मनब्दा में 2, भांबेरी में 6 और थार में 1 लाभार्थी को भैंस दिये जाने की जानकारी दर्ज की गयी थी. विशेष घटक योजना के अंतर्गत सन 2015-16 में 269 तथा सन 2016-17 में 280 भैंसों का वितरण किया गया था.