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    अकोट. अकोट तहसील में खरीफ सीजन शुरू हो गया है. क्योंकि रोहिनी नक्षत्र जो मई के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है. रोहिनी नक्षत्र ने भी बारिश का दमदार आगमन से तहसील में खरीफ सीजन प्रारंभ हो गया है. इसलिए किसान मानसून के मौसम से पहले की बुआई में व्यस्त हो गए हैं.

    कपास और सोयाबीन की खेती की बुआई भी शुरू कर दी गई है. तहसील में 50,000 हेक्टर में खरीफ की बुआई की योजना बनाई गई है और इस साल अच्छी बारिश होने के संकेत प्राप्त होने से किसानों में उत्साह है. इस वर्ष कृषि विभाग द्वारा तहसील में 59,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुआई की योजना बनाई जा रही है.

    इस साल कपास, सोयाबीन, मूंग, तुअर, उड़द, ज्वार, मक्का और तिल बढ़ने की उम्मीद है. क्योंकि बारिश के अच्छे संकेत हैं. वर्तमान में तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व-खेती कार्य चल रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में बुआई भी शुरू हो गई है. कृषि विभाग की इस वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ की बुआई का उदिष्ट कुल 49,500 हेक्टेयर क्षेत्र में उस में कपास 37 हजार हेक्टेयर, सोयाबीन 12,500 हेक्टेयर, मूंग 8,000 हेक्टेयर, तुअर 5,000 हेक्टेयर, उड़द 2,500 हेक्टेयर, ज्वार 2,000 हेक्टेयर, मक्का 750 हेक्टेयर और तिल 100 हेक्टेयर में होने की उम्मीद है.

    इस बात के संकेत हैं कि पिछले साल की तुलना में इस साल सोयाबीन की बुआई बढ़कर 1,500 हेक्टेयर हो जाएगी. कृषि विभाग के अनुसार इस साल 5,662 हेक्टेयर में कपास और 875 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई पूरी हो चुकी है. पिछले साल सोयाबीन की अंकुरण क्षमता की समस्या के कारण तहसील में बहुत कम कृषि केंद्र संचालकों ने इस साल बिक्री के लिए सोयाबीन के बीज बुक किए थे. हालांकि कृषि केंद्रों के सभी संचालकों के साथ आनलाइन बैठकों के माध्यम से चर्चा की गई और उसके बाद कृषि केंद्रों के संचालक निजी सोयाबीन बीज बेचने पर सहमत हुए.  

    सोयाबीन के बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच घर में ही करनी चाहिए 

    बीजोपचार उसी क्रम में करना चाहिए जैसे विटावैक्स 3 ग्राम/किलो, थायमीथोक्झाम 10 मिली/किलो, रायझोबिअम 25 ग्राम/की. कृषि विभाग किसानों को सलाह देता है कि वे बिना अंकुरण और बीज प्रसंस्करण के बुआई न करें. 

    पर्याप्त नमी बनने तक बुआई करने में जल्दबाजी न करें 

    बुआई जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए जब तक मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो यानी 80 से 100 मिमी बारिश हो. साथ ही बुआई बीबीएफ विधि या बेल्ट बुआई विधि से करनी चाहिए. गांव-गांव जाकर किसानों को बीज की प्रक्रिया का प्रात्यक्षिक दिखाया जा रहा है. किसानों को बीज प्रसंस्करण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग ने प्रतियोगिताएं भी आयोजित की हैं. – तहसील कृषि अधिकारी, अकोट