15 percent deaths in the world in Covid-19 related to living in air pollution environment: study
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    अकोला. कोरोना की पृष्ठभूमि में सरकार की ओर से घोषित सख्त पाबंदियों के चलते महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का काम भी ठप हो गया है. क्योंकि लगभग सभी फैक्ट्रियां बंद हैं, इसलिए उनके निरीक्षण भी पिछले पंद्रह महीने से बंद हैं. इस बीच केवल नदी के पानी के नमूने लिए जा रहे हैं और परीक्षण के लिए नागपुर की एक प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है, यह जानकारी अकोला के महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उप प्रादेशिक अधिकारी कार्यालय क्षेत्र अधिकारी पी.एम. मेहरे ने दी. अकोला में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक उप क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय है, जो अकोला और बुलढाना इन दो जिलों को कवर करता है.

    अकोला जिले में कुल 800 छोटे और बड़े कारखाने हैं तथा बुलढाना जिले में कुल 1200 छोटे और बड़े कारखाने हैं. पिछले साल मार्च में कोरोना के राज्य में प्रवेश करने के बाद सरकार द्वारा घोषित लाकडाउन के तहत राज्य के सभी छोटे और बड़े उद्योग और कारखाने बंद कर दिए गए हैं. महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उप क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय द्वारा इन उद्योगों और कारखानों का निरीक्षण बंद है क्योंकि कृषि संबंधी उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी उद्योग बंद हैं.

    नागरिक कारखाने के जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और कूड़े के संबंध में उप-क्षेत्रीय कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. 15 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान करने के लिए कार्यालय जिम्मेदार है. यदि निर्धारित समय के भीतर समाधान नहीं होता है, तो अगले 12 दिनों के भीतर अमरावती क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इसका समाधान किए जाने की उम्मीद है. यदि कोई समाधान नहीं होता है, तो नागरिक प्रधान कार्यालय के विधि अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

    पिछले वर्ष दी गयी थी एक फैक्ट्री को नोटिस

    पिछले वर्ष बुलढाना जिले में बेंजोकेन इंडस्ट्रीज केमिकल फैक्ट्री को रासायनिक संयंत्र से अपशिष्ट निकालने में विफल रहने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. फैक्ट्री के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि फैक्ट्री ने नोटिस के बाद अपशिष्ट जल निकालने की व्यवस्था की जाने की जानकारी क्षेत्र अधिकारी पी.एम. मेहरे ने दी है. 

    पखवाड़े भर में कोई कार्रवाई नहीं

    पिछले एक पखवाड़े में कार्यालय द्वारा अकोला एमआईडीसी तथा अन्य भागों में किसी भी छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. मेहरे ने यह भी दावा किया कि किसी भी कारखाने के कामकाज में कोई खराबी या खामी नहीं पाई गई.

    जलस्रोतों के सैम्पलों की जांच जारी

    ‘राष्ट्रीय जल निगरानी कार्यक्रम’ के तहत इस समय अकोला और बुलढाना जिले में पूर्णा, पैनगंगा, मोर्णा, काटेपूर्णा इन नदियों के पानी के सैम्पल प्रत्येक तीन माह के अंतराल बाद जांच के लिए नागपुर स्थित विभागीय कार्यालय की ओर भेजे जाते हैं. इसी तरह घुंगशी, नेरधामणा बैरेज, कापसी तालाब के पानी के सैम्पल प्रत्येक माह जांच के लिए नागपुर भेजे जाते हैं.

    अभी तक इनमें से कोई भी जल स्रोत का नमूना दूषित नहीं पाया गया है. दो साल पहले पूर्णा नदी का पानी कुछ हद तक हरा हो गया था. लेकिन अब इसमें कोई दूषितता नहीं मिली है, यह भी क्षेत्र अधिकारी पी.एम. मेहरे ने स्पष्ट किया है. 

    वाहन प्रदूषण

    नागरिक वाहन प्रदूषण के संबंध में संबंधित उप क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं. नागरिक शहरी क्षेत्रों में वायु, जल, ध्वनि और ठोस अपशिष्ट प्रदूषण के संबंध में नपा के मुख्याधिकारी, तहसीलदार और मनपा आयुक्त को शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की शिकायत ग्रामसेवक, पटवारी, तहसीलदार के साथ साथ पुलिस निरीक्षक, अग्निशमन अधिकारी या राजस्व अधिकारी के पास दर्ज करायी जा सकती है.