पोस्को के तहत सजा कायम, बालक के साथ अनैसर्गिक कृत्य

अकोला. पुराना शहर पुलिस थानांतर्गत एक बालक के साथ अनैसर्गिक अत्याचार प्रकरण के आरोपी को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने दो आरोपों से निर्दोष बरी किया है. लेकिन पोस्को के एक प्रकरण में आरोपी को सुनाई गई 3 वर्ष की सजा कायम रखी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार वाशिम बायपास परिसर स्थित एक शासकीय शौचालय में 24 अप्रैल 2018 को एक नाबालिग बालक पर गजानन अर्दले  ने 500 रु. का लालच देकर अनैसर्गिक अत्याचार किया था. इस प्रकरण में पुराना शहर पुलिस थाने में भादंवि की धारा 377, 504, 323 तथा पोस्को कानून की धारा 8 और 10 के तहत मामला दर्ज किया गया था.

8 गवाहों के बयानों की जांच
 जिला व सत्र न्यायालय में 8 गवाहों के बयानों की जांच की गयी थी. बाद में न्यायालय ने आरोपी को धारा 377 के तहत 10 वर्ष की कैद और 10 हजार रु. जुर्माना का निर्णय 6 फरवरी 2019 को दिया था. इसके साथ ही धारा 354 के तहत 3 वर्ष की सजा, 10 हजार रु. जुर्माना, धारा 294 के तहत 2 हजार रु. जुर्माना, पोस्को की धारा 10 के तहत 5 वर्ष की सजा और 10 हजार रु. जुर्माना तथा धारा 8 के तहत 3 वर्ष की कैद की सजा सुनायी थी.

आरोपियों के वकीलों ने इस निर्णय के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में शरण ली. नागपुर उच्च न्यायालय ने आरोपी की अनैसर्गिक कृत्य और विनयभंग तथा पास्को की एक धारा के तहत निर्दोष बरी करने का निर्णय दिया लेकिन पोस्को की धारा 8 के तहत 3 वर्ष 6 माह की सजा को कायम रखा है. इस प्रकरण में आरोपी की ओर से एड.अजय लोंढे ने न्यायालयीन कामकाज किया.