समयबद्ध संशोधन प्रारुप सरकार की ओर प्रस्तुत करें

  • मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिए कृषि विद्यापीठों को निर्देश

अकोला. किसानों के जीवन की अस्थिरता समाप्त करने हेतु सूचना तंत्रज्ञान और जैव तंत्रज्ञान का उपयोग कर बीज उत्पादन से मार्केटिंग तक का समयबद्ध, सकारात्मक परिणामों की दिशा में अग्रसर एक निश्चित संशोधन प्रारुप राज्य के चारों कृषि विद्यापीठों ने मिलकर सरकार को प्रस्तुत करें, यह निर्देश मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिए हैं. डा.पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ अकोला और महाराष्ट्र कृषि शिक्षा व संशोधन परिषद पुणे के संयुक्त कृषि संशोधन और विकास समिति 2020 की 48वीं सभा अकोला में ऑनलाइन पद्धति से आयोजित की गयी जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया.

अध्यक्षता राज्य के कृषि मंत्री तथा कृषि विद्यापीठों के प्रतिकुलपति दादाजी भुसे ने की. कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे, रोजगार गारंटी व फलोत्पादन मंत्री संदिपान भुमरे प्रमुखता से उपस्थित थे. पालकमंत्री बच्चू कडू, सहकार राज्यमंत्री विश्वजीत कदम, राज्यमंत्री आदिती तटकरे, कृषि सचिव एकनाथ डवले, कृषि शिक्षण व संशोधन परिषद पुणे के महासंचालक विश्वजीत माने, महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ राहुरी के उप कुलपति डॉ. के. पी. विश्वनाथा, वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विद्यापीठ परभणी के उप कुलपति डॉ. ए. एस. ढवण, डॉ. बालासाहब सावंत कोकण कृषि विद्यापीठ दापोली के उप कुलपति डॉ.एस.डी. सावंत आदि शामिल हुए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाकडाउन के समय खेती यह एक ऐसा क्षेत्र है जो खुला रहा. खेती में सूचना तंत्रज्ञान का उपयोग बढ़ना आवश्यक है. आपदा से रक्षा हेतु तकनीक का उपयोग किस तरह किया जाए इस संदर्भ में संशोधक अभ्यास करें. राज्य स्तरीय बैठक के स्वागताध्यक्ष अकोला के डा.पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के उप कुलपति डा.वी.एम. भाले ने बैठक का प्रयोजन व रुपरेखा स्पष्ट की. इस वर्ष चारों कृषि विद्यापीठों से कुल 208 सिफारिशें बैठक में प्रस्तुत की जाएगी जिसमें 16 फसल वाण, 12 यंत्र व औजार तथा 180 फसल उत्पादन तकनीक का समावेश है. संचालन जनसंपर्क अधिकारी डा.किशोर बिडवे ने किया. अंतमें आभार प्रदर्शन संशोधन संचालक डा.विलास खर्चे ने किया. 

संशोधन की दिशा स्पष्ट करनेवाला सशक्त मंच : राज्य के कृषिमंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि बदलते मौसम से खेती के फसलों पर हो रहे परिणाम यह कृषि संशोधकों के सामने एक आहवान है. विचार विमर्श कर संशोधन की दिशा कैसी रहे यह स्पष्ट करनेवाला सशक्त मंच है. कपास और सोयाबीन फसलों के लिए गुणवत्ता पर गहरा संशोधन जरुरी है.

सूचना तकनीक का उपयोग बढ़ाएं -कृषि क्षेत्र में सूचना तकनीक का उपयोग बढ़ाने का आहवान केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने किया और कहा कि इसके लिए कृषि क्षेत्र का डाटा संकलन परिपूर्ण एवं अधिकृत होना आवश्यक है. कृषि विद्यापीठ द्वारा कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया गया है. विद्यापीठों में चर्चासत्रों का आयोजन कर विद्यार्थियों में खेती के प्रति रुची निर्मित होकर खेती की प्रगती को बढ़ाने में मदद मिलेगी.

संजय धोत्रे, केंद्रीय राज्यमंत्री