दो विभागों में समन्यव के कारण जिले की यात्रा कुपोषण मुक्ति की ओर

  • तीव्र और मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई

अकोला. जिला परिषद के स्वास्थ्य और महिला व बाल कल्याण विभाग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली के कारण पिछले अनेक वर्षों से जिले में कुपोषण की संख्या के कारण उत्पन्न विवाद अब समाप्त होकर अब इन दोनों विभागों के समन्वय से अकोला जिला कुपोषण मुक्ति की ओर बढ़ने लगा है. वर्तमान में, जिले में वजन के अनुसार 588 बच्चे हैं और ऊंचाई के मामले में केवल 45 बच्चे तीव्र कुपोषण की श्रेणी में हैं.

यह संख्या पहले की तुलना में बहुत कम है. ये दोनों विभाग इन बच्चों को कुपोषण की चपेट से बाहर निकालने के लिए वर्तमान में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. इससे पहले, महिला व बाल कल्याण विभाग और जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग कुपोषण के क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे. एक ओर आंगनवाड़ी सेविका और पर्यवेक्षिका तथा दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवक, सेविका और आशा स्वयंसेविका घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों के बारे में जानकारी एकत्र करते थे.

जिससे कई बार दोनों विभागों द्वारा कुपोषण के संदर्भ दी गयी जानकारी में अंतर पाया जाता था. इस बीच जि.प. के सीईओ सौरभ कटियार की सूचना के अनुसार जिले के ग्रामीण भागों में तथा शहरी भागों में स्वास्थ्य और महिला बाल कल्याण विभाग यह संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं. दोनों विभाग अब कुपोषित बच्चों को शीर्ष पर लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

जिले में कुपोषण का प्रमाण

आंगणवाड़ियों में आनेवाले बालक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बालकों की वजन के अनुसार, तन तथा उंचाई के अनुसार इस तरह तीन तरीकों से कुपोषण के आंकड़ों की गणना की जा रही है. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 5151 बच्चे वर्तमान में जिले में वजन से कम कुपोषित हैं और 588 बच्चे तीव्र कुपोषण की श्रेणी में हैं. स्वास्थ्य और महिला व बाल कल्याण विभाग के कर्मचारी इन सभी बच्चों को पौष्टिक और पूरक भोजन प्रदान करके उन्हें सबसे आगे लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कुल 8 प्रकल्पों में कुपोषण पर काम शुरू है. जिसमें अकोला-1 और अकोला-2 इन दो प्रकल्पों के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्रों में कुल 148 बालक तीव्र कुपोषण की श्रेणी में आते हैं. इसी तरह बार्शीटाकली प्रकल्प में 76, अकोट में सबसे अधिक 121, तेल्हारा में 67, बालापुर 65, मुर्तिजापुर 50 तथा पातुर प्रकल्प के अंतर्गत आनेवाले क्षेत्र में 61 बालक तीव्र कुपोषण की श्रेणी में होने की जानकारी है. 

तन के अनुसार, मध्यम और तीव्र रूप से कुपोषित बच्चे कम पाए गए हैं. जिसमें 7 मध्यम कुपोषित और केवल 3 तीव्र रूप से कुपोषित बच्चे है. उंचाई के अनुसार मध्यम कुपोषित बालकों की संख्या 170 है तथा तीव्र रूप से कुपोषित बालकों की संख्या 45 है. जिसमें अकोट प्रकल्प के सबसे अधिक 20 बालक तीव्र कुपोषित पाए गए हैं. अकोला-2 और बालापुर प्रकल्प में प्रत्येक 8 बालक तीव्र कुपोषित मिल हैं. अन्य 4 प्रकल्पों में प्रत्येक दोन बालक तीव्र कुपोषित पाए गए हैं.

जिले में कुपोषित बालकों की खोज मुहिम जारी-मरसाले

जि.प. महिला व बाल कल्याण विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी विलास मरसाले ने कहा कि मध्यम और तीव्र कुपोषित बालकों को अच्छी श्रेणी में लाने के लिए इन बालकों को ट्रॅकिंग करने की मुहिम जिले में शुरु है. इन कुपोषित बच्चों को आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों से पूरक और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है. कोरोना अवधि के दौरान, अकोला जिला इन बच्चों को घर पहुंचपौष्टिक आहार प्रदान करने में सबसे आगे रहा है. इसलिए, यह कहना ठीक होगा कि अकोला जिला कुपोषण मुक्ति की ओर बढ़ रहा है.