शहर तथा जिले में आसमान पर छाई रही तरह तरह की पतंगें

  •  चली चली रे पतंग मेरी चली रे 
  •  पतंगें काटने के लिए दिन भर जमी रही युवा पीढ़ी 

अकोला. सूरज की पहली किरण पर महानगर व जिले में बच्चों व युवाओं ने पतंग उड़ाकर उत्तरायण का स्वागत किया. इसी तरह महानगर व जिले में ढील दे ढील दे, ये लपेट व कांटो छे की आवाज से गूंज उठी. जिले व महानगर में आज आसमान रंग बिरंगी दिख रहा था. पूरे आसमान पर पतंगें छायी हुई थीं. बच्चों को ऑनलाइन स्कूल का अवकाश होने से पतंग उड़ाने में बच्चें बड़ी संख्या में मैदानों तथा सड़कों पर भी दिखाई दिए. आसमान में प्लॉस्टिक की पतंग की जगह पर बड़ी संख्या में कागजों और कपड़ों की पतंगें दिखाई दी.

पतंगबाजों का कहना हैं कि प्लॉस्टिक की पतंग की जगह कागज की पतंग उड़ाने से पतंग जल्दी कटती नहीं हैं. प्लॉस्टिक की पतंग के बजाए कागज की पतंग में तान अधिक रहने से पतंग उड़ाने में आनंद अधिक आता है. बड़ी संख्या में कुछ बच्चें पतंग उड़ाने की जगह कटी हुई पतंगें लूटने में सक्रिय देखे गए. कुछ कुछ बच्चों ने तो शाम तक 8 से 10 पतंगे लूटकर जमा भी कर ली थी. मकर संक्रांति पर युवाओं के साथ साथ बच्चों और बुजूर्गो ने भी दिन भर पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का त्योहार उत्साह के साथ मनाया.

गीत बजाकर उड़ाई पतंग

महानगर में छत पर युवाओं ने साऊंड सिस्टिम लगाकर फिल्मी गीतों के साथ नाचते गाते पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति उत्साह से मनाई. मकर संक्रांति पर युवाओं ने पतंग पर अधारित गीतों को खूब बजाकर उत्साह से पतंग उड़ाई. मकर संक्रांति पर युवाओं ने गीतों में ढील दे ढील दे ढील दे दे रे भैया, मेरी जिंदगी कटी पतंग, चली चली रे पतंग मेरी आसमा के पार आदि गीतों को बजाकर उत्साह कायम रखा.

पतंग की रंगोली डालकर उत्सव मनाया

इसी तरह महानगर व जिले में मकर संक्रांति पर पतंग की रंगोली डालकर मकर संक्रांति के त्योहार का स्वागत किया. इसी तरह स्थानीय तारफैल निवासी श्वेता कवठेकर इस युवती ने अपने घर के सामने पतंग व चकरी की रंगोली निकालकर उत्साह से उत्तरायण का स्वागत किया. मकर संक्रांति पर सूरज दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव में प्रवेश करता है. इसी उत्तरायण का स्वागत जिले व महानगर में महिला व युवतियों ने पतंग की रंगोली डालकर किया है. वैसे भी हमारी संस्कृति में रंगोली डालना शुभ माना जाता है.