निशानेबाज़

Published: Apr 05, 2022 01:54 PM IST

निशानेबाज़आकाश पर लगी है आंख, आसमान में हुआ सुराख गिरा मलबा और राख

कंटेन्ट राइटरनवभारत.कॉम
कंटेन्ट एडिटरनवभारत.कॉम

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, आपको कवि दुष्यंत कुमार का शेर याद होगा- कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों! हमें लगता है कि सचमुच किसी ने काफी जोर से पत्थर उछाल दिया, तभी तो आसमान में रात के समय चमकीली रोशनी नजर आई और वहां से जलती हुई चीजें पृथ्वी पर आ गिरीं. महाराष्ट्र के चंद्रपुर और वर्धा जिले में 3 मीटर की धातु की रिंग, गोला और 40 किलो का सिलेंडर मिला. ऐसी आसमानी आफत में कहीं कोई सुरक्षित नहीं है. सवाल यह भी उठता है कि अंतरिक्ष संस्थाएं, सुरक्षा और गृह विभाग गाफिल कैसे रहे? जो कुछ भी आसमान से गिरा, वह क्या था?’’

हमने कहा, ‘‘यह चीन के उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट का मलबा है. अच्छा है जो यह किसी के सिर पर नहीं गिरा. कोई मकान भी इसकी चपेट में नहीं आया. आसमान में भेजे गए पुराने उपग्रहों का मलबा कभी भी गिर सकता है. यदि वह वायुमंडल में जलकर नष्ट नहीं हो पाया तो पृथ्वी पर आ सकता है.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह तो बहुत खतरनाक बात है. ऐसे ही एक जमाने में स्कायलैब गिरने का खतरा पैदा हो गया था.’’

हमने कहा, ‘‘पहले भी आसमान से बहुत कुछ गिरता रहा होगा, तभी तो कहावत बनी- आसमान से लटके, खजूर में अटके! आकस्मिक रूप से ऊपर से गिरने वाली चीजों से बचना है तो खजूर के पेड़ लगा दीजिए. जो भी गिरेगा, वहीं अटक जाएगा और आपका सिर सलामत रहेगा.’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आसमान से नियामत भी बरस सकती है. लोगों की उम्मीदें जगाते हुए कहा गया है- ऊपरवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के! हम भी अपने घर का छप्पर फटने का इंतजार कर रहे हैं कि कल बेशुमार दौलत बरसेगी. अब आप हमारी शायरी सुनिए. अर्ज किया है- माना कि आसमान से ये दुनिया बड़ी है, लेकिन यहां हर वक्त ये मुश्किल में पड़ी है! इस जमीं से दूर आसमां था कहां, खोए भाईचारे को अब ढूंढ ले आएं यहां!’’ हमने कहा, ‘‘इंसान की सारी ख्वाहिश कभी पूरी नहीं होती. इसीलिए कहा गया है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता!’’