मुंबई

Published: Apr 05, 2024 08:05 PM IST

Arun Gawli to get releaseलोकसभा चुनाव से पहले अरुण गवली की रिहाई, जानें कोर्ट ने क्यों दिया समय से पहले रिहा करने का आदेश

कंटेन्ट राइटरनवभारत.कॉम

मुंबई: कई दशकों तक मुंबई मायानगरी पर राज करने वाला कुख्यात गैंगस्टर और डॉन अरुण गवली (Arun Gawli) जल्द ही जेल से आजाद हो जाएगा। लोकसभा में चुनाव गवली के मतदान की उम्मीद भी जताई जाने लगी है। दरअसल गवली की रिहाई (premature release) का आदेश नागपुर पीठ की ओर से दिया गया है। सजा के समय से पहले ही उसे रिहा करने का आदेश कोर्ट ने खुद गवली की मांग पर दिया है। गवली ने 2006 के सरकारी फैसले के आधार पर सजा से छूट की मांग की थी। 

किस मामले में मिली सजा गवली को मुंबई पार्षद कमलाकर जामसंदेकर हत्याकांड और अन्य अपराधों के लिए वर्ष 2007 से दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। फिलहाल गवली नागपुर जेल में सजा काट रहा है। 

गवली की याचिका पर कोर्ट का आदेश 
अरुण गवली की याचिका पर नागपुर बेंच में सुनवाई पूरी हो गई। हालांकि, कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए गवली को समय से पहले रिहा करने का निर्देश दिया है। हालांकि, जेल प्रशासन को उस संबंध में जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया गया है। अब जेल प्रशासन क्या फैसला लेगा? ये देखना अहम होगा। क़ानूनी जानकारों की माने 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके, विकलांग, आधी सजा पाए कैदी को सजा से छूट दी गई है। इसके मुताबिक, डॉन अरुण गवली को सजा से जल्द रिहाई की मांग की गई थी और कोर्ट के फैसले के बाद अब उसके जेल से रिहा होने की संभावना है। 

सरकार परिपत्र 2006 क्या है?
1) आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों को चौदह साल की कैद पूरी करने के बाद जेल से रिहा किया जा सकता है, साथ ही अगर उनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो, वो विकलांग हो। 
2) चूंकि गवली का जन्म 1955 में हुआ था इसलिए उनकी उम्र 69 साल है। 
3) अरुण गवली जामसंदेकर हत्या मामले में 2007 से जेल में हैं और पिछले सोलह साल से जेल में हैं। 
4) दूसरे शब्दों में, अरुण गवली 2006 के महाराष्ट्र सरकार के परिपत्र के अनुसार रिहाई की दोनों शर्तों को पूरा करता है। 
5) इसलिए कोर्ट ने फैसला किया है कि उन्हें सजा से पहले रिहा कर दिया जाए।