रोजाना 25 टन कचरा प्रभागों में ही होता है नष्ट

  • खाद बनाने की प्रक्रिया ने पकड़ी गति

अमरावती. शहर में सुकली स्थित कंपोस्ट डिपो का भार कम करने दो घनकचरा प्रकल्पों का युध्द स्तर पर किया जा रहा है. इसके अलावा महानगरपालिका ने स्वयं स्फूर्ति से शहर में 25 गड्ढे तैयार किए है. जिसमें शहर से निकलने वाला 25 टन कचरा वहीं पर नष्ट किया जाता है. वहीं दूसरी ओर इन गड्ढों से तैयार होने वाला खाद भी मनपा के उद्यानों के लिए पोषक बनने से मनपा के उद्यान भी हरे हरे दिखाई दे रहे है. 

250 टन रोज निकलता है कचरा

शहर में डेढ़ लाख से अधिक संपत्तियां, होटल अस्पताल आदि से रोजाना 250 टन गीला व सूखा कचरा निकलता है. जिसमें से 25 टन कचरा प्रभागों में ही नष्ट किया जाता है. कचरे से खाद की निर्मिती होने के बाद लोगों ने भी कचरे के महत्व को समझते हुए इसी तरह के 10 बाय 4 फीट के गड्ढे तैयार कर वहां कचरे की प्रोसेस के लिए अनुमति मांगी है. लगातार 15 दिनों तक इस गड्ढों में कचरा जमा किया जाता है जिस पर मनपा द्वारा प्रोसेस की जाती है और खाद बनाया जाता है यह खाद लोग अपने घरों के साथ मनपा के उद्यानों में डालते है. जिसके कारण इस खाद की डिमांड भी बढ़ती जा रही है.  

अंतिम सप्ताह तक शुरू होगा अकोली प्रकल्प

प्रशासन की माने तो, मनपा के दो प्रकल्प तैयार होने से प्रभागों में यह गड्ढे तैयार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. जितने है उसी प्रकल्पों से खाद बनाने का काम किया जाएगा. शहर से रोजाना निकलनेवाला 225 टन कचरा सुकली प्लांट पर ले जाया जाता है. सुकली में भी अधिकांश कचरा नष्ट होने से इसका भी खाद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. अकोली का घनकचरा प्रकल्प नवबंबर के अंतिम सप्ताह तक पूर्ण हो जायेगा. परिणामत: 100 टन से अधिक कचरा इस प्रकल्प पर ले जाया जाएगा. जिसके कारण सुकली में कचरे का भार कम हो जाएगा. 

बड़े-बड़े उद्यानों में भी केचुआ खाद

वडाली, छत्री तालाब में भी केचुआ खाद तैयार करने का काम किया जा रहा है. गिला कचरे से यह खाद बनाए जाने से केवल सूखा कचरा ही कंपोस्ट डिपो में ले जाया जाता है. वर्ष 2016 के घनकचरा व्यवस्थापन नियम अंतर्गत यह प्रोसेस की गई है. 

कचरा जलाए नहीं 

कचरा जलाने से प्रदूषण होता है. हरित लवादा के आदेशों के अनुसार यह गलत भी है. कचरे को केवल सूखा और गिला अलग कर उसे कचरा गाड़ी में डाले. या फिर अपने प्रभाग में यदि कचरे से खाद तैयार किया जाता है तोउसमें भी कचरे को डाल सकते है.

डा. सीमा नेताम, स्वच्छता वैद्यकीय अधिकारी