400 वर्षों पूरानी धरोहर सीढ़ियों वाला कुंआ

  • तलेगांव में प्राचीन वस्तुकला के होते है दर्शन

तलेगांव दशासर. तलेगांव दशासर ग्राम अपने नाम के साथ ही कई प्राचीन दंत कथाओं की एक ऐतिहासिक धरोहरों वाला ग्राम है. यहां की ईंटें पानी पर तैरती है. साथ ही यहां पर कई धार्मिक स्थलों के साथ ही प्राचीन काल के कुंए, पत्थर पर की गई नक्काशी कला के भी अद्भूत दर्शन होते हैं. यहां पर वार्ड नंबर 1 में हनुमान का प्राचीन काल का मंदिर भी है. जहां अंदर एक कुंआ है. जो संपूर्ण पत्थरों से ही निर्माण किया गया है. जिसकी बनावट को देखकर वह किसी काल में कुंए के साथ ही अंदर रहने के लिए भी बनाया गया था.

कई ऐतिहासिक बातें जुड़ी हैं कुंए से

यह सीढ़ियों वाला कुंआ पूराने बुज़ुर्गों के अनुसार चोर बाहुली (चोरों का कुंआ) नाम से भी जाना जाता है. पिछले प्राचीन काल में डाकुओं द्वारा चोरी करने के बाद इस कुएं के किनारों पर बने एक घर नुमा स्थान पर पत्थर की चक्की, चूल्हा भी है. जो वहां कुंए में किसी के रहने का प्रमाण देता है. वहीं यहां पर कई ऐसी प्राचीन वास्तु शास्त्र की जीती जागती वस्तुएं हैं, इस ग्राम के नाम में चार चांद लगाती है.

तल से पड़ा नाम

इस गांव को तलेगांव कहने के पीछे भी एक बड़ी बात है. इसके आसपास कई तालाब थे. जिन्हें मराठी भाषा में तल कहा जाता है. इसी कारण इसे तल वाला यानी तलेगांव कहां जाता है. वैसे भी यहां देखने पर यह गांव ऐतिहासिक धरोहर जतन वाला है, जो पुरातत्व विभाग की अनदेखी से प्राचीन वस्तुओं को अछूता रखा गया है.