Gosekhurd Dam, Bhandara

अमरावती. विदर्भ के बांध को पूर्ण करने के लिए 60 हजार करोड़ रुपयों की आवश्यकता है. विदर्भ के बांध को आवश्यक निधि महाराष्ट्र वादी भगा ले गए  जाने का आरोप लगाते हुए विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने इतनी बड़ी रकम अब महाराष्ट्र सरकार कैसे देगी? ऐसा सवाल उपस्थित किया है. विदर्भ का अनुशेष पूर्ण करने के लिए समिति ने राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से मिलने का निर्णय लिया है. 

बढ़ रही बेरोजगारी, गरीबी

विदर्भ का अनुशेष पूर्ण करने, सरकारी की निधि को अन्य राज्यों में ले जाने पर नियंत्रण रखने का काम सरकार का है. लेकिन आज तक किसी भी राज्यपाल ने विदर्भ निधि भगा ले जाने पर आपत्ति नहीं जताई. इसलिए आज विदर्भ सूखा पड़ा है. अनुशेष के चलते ही जिले में 40 हजार किसानों ने आत्महत्याएं की है. जो निधि दिया जाता है वह भी साल के अंत में जो शेष बचा है वहीं दिया जाता है.

इसलिए वह भी विदर्भ के विकास पर खर्च न करते ही वापस चला जाता है. जब दुबारा मिलता है तो पहले महाराष्ट्र वादी उनकी ओर से खर्च कर लेते है. इसिलिए आज भी विदर्भ गरीबी, बेरोजगारी और किसान आत्महत्याएं बढ़ती जा रही है. 

जमीन, बिजली फिर भी विदर्भ प्यासा 

राज्य की 90 प्रतिशत गौण खनिज संपत्ति विदर्भ में है. 53 प्रतिशत जमीन है, 75 प्रतिशत बिजली विदर्भ में तैयार होती है बावजूद इसके यहां पर उद्योग नहीं है और तैयार होने भी नहीं देते. बिजली होने के बाद भी किसानों को 10 घंटे लोडशेड़िग झेलनी पड़ती है. विदर्भ के बांध पूर्ण न करना, बिजली नहीं देना यही कारण होने से इसकी शिकायत राज्यपाल से की जाएगी.

इसके पहले भी राज्यपाल से मिलने का प्रायस किया था लेकिन उस दौरान मुलाकात नहीं हो पायी. आखिरकार राज्यपाल से मिलकर नागपुर करार का पालन करने की मांग की जाएगी. करार के अनुसार महाराष्ट्र की तिजोरी में से 23 प्रतिशत हिस्सा विदर्भ के विकास पर खर्च करना होगा.