Will the school fulfill its responsibility? - 4 will open, questions still in parents' minds
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अमरावती. स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों को स्थायी रूप से बंद करने के सरकार के फैसले के विरोध में संस्था चालक एकजुट हुए है. इसी के तहत शुक्रवार को जिले की 600 स्कूलों में कड़ा बंद रखा गया. इस दौरान यह निर्णय रद्द करने की मांग को लेकर अमरावती जिला शिक्षा संघ की ओर से जिलाधीश शैलेश नवाल ने निवेदन सौंपा गया.

रद्द करें निर्णय

राज्य सरकार द्वारा 11 दिसंबर 2020 को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए नया निर्णय लिया है. जिसके अनुसार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों को स्थायी रूप से हटा दिया गया है. इस फैसले का विरोध करने के लिए महाराष्ट्र राज्य शिक्षा संस्था महामंडल द्वारा राज्यव्यापी शाला बंद आंदोलन किया गया. इस आंदोलन को जिला शिक्षा संस्था संघ ने संपूर्ण समर्थन घोषित कर सभी स्कूलों को बंद करने का आह्वान किया. संस्था संचालकों द्वारा जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को निवेदन सौंपा गया. जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लेकर लिया निर्णय रद्द करने की मांग की गई. 

भर्ती की अनुमति दें

गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भर्ती करने की अनुमति दी जाए, शैक्षिक संस्थानों को सीधी भर्ती के माध्यम से स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की अनुमति दी जाए आदि विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया गया. इस समय अध्यक्ष कांचनमाला गावंडे, उपाध्यक्ष राजा देशमुख, सचिव मेघश्याम करडे, रामकृष्ण कलसकर, शेषराव खाडे, एड. दीपक देशमुख, सुशील इखनकर, संगिता शिंदे, रवि गजभिये, राजेश टारपे, मुख्याध्यापक संघ के ललीत चौधरी, अशोक चोपडे, राजेश हुतके, साहेबराव दामोधरे, चतुर्थश्रेणी कर्मचारी संगठन के जयंत भोपत, राजकुमार चैनानी, महेंद्रसिंह सोमवंशी, दिलीप कडू, शरद तिरमारे, गजानन वानखडे, विश्वनाथ सदाशिवे, केशव पाटील, राजेंद्र पेटले, अभय जैन, प्रवीण दिवे, रमेश वर्हाडे आदि उपस्थित थे.