Market Parvana incurs loss of 2.50 crores, losses in Corona

  • सदन में गरमाया माहौल

अमरावती. महानगरपालिका की आमसभा में सत्ताधारियों ने उनके तथा प्रशासन ने अपने अधिकार गिनाये. पदोन्नति को लेकर सभागृह में ऐसा घमासान हुआ कि आखिरकार प्रशासन और सत्तारुढ़ आमने-सामने आ गये. आखिरकार पदाधिकारियों ने मध्यस्थता कर विषय को निपटाने का प्रयास किया. प्रशासन व सभागृह दोनों अलग-अलग दिशाओं जाते है तो निश्चित ही यह शहरवासियों के लिए विश्वसनीय नहीं रहेगा, इसलिए सभागृह को हंसी मजाक के साथ चलाने का आवाहन किया,लेकिन इस विषय के चलते सभागृह में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण वातावरण निर्माण हुआ था. 

आघात नहीं करें : पवार
प्रशासन की ओर से 10 अधिकारियों को पदोन्नति का विषय पटल पर आते ही मिलिंद चिमोटे ने प्रशासन से जबाव तलब किया. उन्होंने कहा कि शासन को भेजा गये प्रस्ताव पर अनुपालन करने से रोक नहीं लगायी जा सकती. यदि सभागृह कोई प्रस्ताव पारित करता है तो वह सभागृह का अधिकार है और उस पर अमल होना चाहिए. चिमोटे ने सभागृह में कितने प्रस्ताव पारित हुए और कितने अमल हुए इसकी सूची भी मंगायी. जिस पर चेतन पवार ने भी किसी के अधिकार पर आघात करना ठीक नहीं होने का सुझाव दिया.

कोरोना अस्पताल को लेकर बैठक हुई प्रस्ताव रखा गया बावजूद इसके अभी तक कोई निर्णय नहीं होने की जानकारी दी. हालांकि इस दौरान विलास इंगोले, प्रशांत वानखडे, बबलू शेखावत ने सभागृह को शांति पूर्ण तरीके से चलाने का प्रयास किया, लेकिन चिमोटे शासन को 451 के तहत भेजे गये प्रस्ताव पर कार्यान्वयन कर सकते हैं अथवा नहीं इसकी जानकारी देने तक ही अड़े रहे. 

तो अवकाश पर चला जाऊंगा : रोड़े
एक ही विषय को लेकर चर्चा समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही थी जिसके कारण निगमायुक्त रोड़े ने सभी विषयों के एक साथ जबाव देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अधिकारी कर्मचारियों की पदोन्नति पर बोलना गलत नहीं है. 7 दिनों में निर्णय लेना असंभव है. प्रत्येक पद भरना भी अनिवार्य है. उतना ही काम का बोझ कम होगा. लेकिन गलत निर्णय लेकर चर्चा का विषय होना भी गलत है. क्योंकि सेवा ज्येष्ठता के दौरान सिनियारिटी का पालन नहीं किया गया.

कई वर्षों से पद भर्ती नहीं हुई है. 7.50 लाख आबादी वाला शहर है. इन दिनों केवल भ्रष्टाचार पर ही मनपा अखबारों में छायी हुई है. प्रशासकीय अधिकारियों को 58 वर्ष सेवा देनी होती है. जिसमें अधिकांश समय विकास के लिए क्यों नहीं दिया जाये. केवल 3 वर्ष एक शहर में रहूंगा, क्योंकि तबादला तो स्वयं नहीं करुंगा, लेकिन अवकाश पर जरूर चला जाऊंगा ऐसी चेतावनी दी. 

मैं भी कोर्ट में जाउंगा : चिमोटे
प्रशासन से लगातार सभागृह के अधिकारों को पूछने के बाद भी संतोष जनक जबाव नहीं मिलने से मिलिंद चिमोटे ने भी इसी विषय को लेकर कोर्ट में जाने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि पदोन्नति के विषय को लेकर सत्ताधारियों पर ही लेन देन होने का आरोप लगाया गया है. सभागृह के अधिकारों का आज जतन नहीं किया गया तो कभी भी नहीं रहेगा. इसलिए मैं भी जबाव पाने के लिए न्यायालय की शरण लूंगा.