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अमरावती. जिले में 553 ग्राम पंचायतों के चुनाव होने जा रहे है. राज्य की राजनीति में सत्ता के लिए जोड़ा गया समीकरण ग्रामपंचायत चुनाव में सहज रुप से जोड़ना महाविकास आघाड़ी को शायद ही असंभव होगा. जिले में निकाय संस्था में महाविकास आघाड़ी का प्रभाव तुलना से अधिक है, लेकिन ग्रामपंचायत में पार्टी की राजनीति को कभी स्थान नहीं मिलता.

गांव की राजनीति पार्टी की बजाए गुट पर निर्भर होती है. इसलिए पार्टी के नेता भी इस चुनाव से दूर रहना ही पसंद करते है. इस चुनाव में विजेता गुट को पार्टी से जोड़ा जाता है. यही खेल इस चुनाव में खेले जाने से सरपंच आरक्षण के बाद ही गठजोड़ (आघाड़ी) के गणीत पर मुहर लगाई जाएगी. 

उम्मीदवार ढूंढने पैनल प्रमुखों का जोर 

भाजपा विरोधी पार्टी है. जबकि शिवसेना, राष्ट्रवादी व कांग्रेस यह सत्ताधारी है. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की जिले में जगह-जगह सत्ता है. जबकि शिवसेना ने कुछ ही क्षेत्रों में अपना वर्चस्व कायम रखा है. ऐसी स्थिति में गांव स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता को समर्थन देने का काम किया जाता है.

प्रत्यक्ष चुनाव में पार्टी स्तर पर हिस्सा नहीं लिया जाता. जो चुनाव में विजयी होगा. उसे ही पार्टी से जोड़ा जाता है. इस चुनाव में भी यही मामला दिखाई देगा. चुनाव के पहले आघाड़ी ग्रामपंचायत में तैयार होने की संभावना काफी कम है. फिलहाल वार्ड आरक्षण के अनुसार उम्मीदवार ढूंढने को ही पैनल प्रमुखों का जोर दिखाई दे रहा है.  

महाआघाड़ी का फॉर्मूला फेल

राजनीतिक पटल पर महाविकास आघाड़ी अस्तित्व में आयी. लेकिन महाविकास आघाड़ी का यह फॉर्मूला ग्राम पंचायत चुनाव में सफल होगा ऐसा नहीं है. उल्टा आघाड़ी करने से पार्टी को नुकसान होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. जिसके कारण आघाड़ी की ओर से तीनों पार्टी एक ही पैनल को मदद करेगी. इसकी संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता. 

संस्थाओं में कांग्रेस का वर्चस्व

जिले की निकाय संस्थाओं पर राज्य की महाविकास आघाड़ी का ही वर्चस्व है. जिस पार्टी के पास सत्ता व उसका प्रभाव अधिक होता है. पालकमंत्री पद कांग्रेस के पास रहने से संस्थाओं में कुछ जगहों पर कांग्रेस का वर्चस्व है. उसके बाद विधायकों के संख्या बल का प्रभाव होता है. ग्राम पंचायत चुनाव व्यक्ति विरोध पर होते है. उसमें भी गुटबाजी को मानने वाले वर्ग बड़े पैमाने पर होते है. पार्टी को बाजू में रखते हुए गुट का समीकरण जोड़ने के लिए कार्यकर्ता अपनी पूरी ताकत लगाते है. इसलिए गांव की परिस्थिति अनुसार ही महाआघाड़ी हो सकती है.