छठ पूजा: अस्त होते सूर्य को दिया अर्घ्य

  • महिलाओं ने संतान-सौभाग्य की प्रार्थना

अमरावती. शुक्रवार को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व मनाया गया. महिलाओं ने संतान की लंबी आयु व समृद्ध जीवन, सौभाग्य की कामना की. इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते घर पर ही सादगी से मनाया गया. महिलाओं ने घरों की छतों आंगन में खड़े होकर पूजन किया. इस समय परिवार के पुरुष और बच्चे भी पूजन में शामिल हुए.

आज होगा समापन

4 दिवसीय इस छठ पूजा के तहत शनिवार को चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व प्रसाद वितरण के साथ पर्व का समापन होगा. महिलाएं अपना व्रत तोड़ेगी. इस व्रत में पूरे 36 घंटे तक व्रती बिना कुछ खाए पिए रहता है. छठ  पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है. छठ  पर्व षष्ठी तिथि से दो दिन पहले यानि चतुर्थी (18 नवंबर) से नहाय-खाय से आरंभ हुआ और इसका समापन सप्तमी तिथि (21 नवंबर) को पारण करके होगी. पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा निभायी गई. दूसरे दिन पंचमी तिथि लोहंडा एवं खरना विधि हुई. तृतीय दिन षष्ठी तिथि यानि छठ पूजा का मुख्य दिन रहता है. इस दिन संध्या के समय सूर्य को अर्घ्य देते हैं. चौथे और अंतिम दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के पश्चात छठ के व्रत का पारण करते हैं.

उत्साह से मनाया

इस बार हमने अपने अपने घरों में ही पर्व मनाया. शुक्रवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया. आस्था का यह महापर्व मनाया. शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा होगा.

-दिनेश सिंह, सार्वजनिक छठ पर्व समिति