विवादित भूमि की सच्चाई खोजेगी समिति, विवि ने गठित की 2समितियां

– प्रेमदास वाडकर

अमरावती. संत गाड़गे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय द्वारा गठित समिति विवादित भूमि की सच्चाई का पता लगाएगी. विवादित भूमि को लेकर विवि ने 2 समितियों का गठन किया है. जिसमें से एक समिति नए नियमों और शर्तों के अनुसार जांच करेगी, जबकि अन्य समिति सरकार स्तर पर फॉलोअप लेगी. समिति ने फिर से विवादित भूमि की जांच शुरू कर दी है. इस समिति की रिपोर्ट कब आएगी इस ओर सभी की नजरें गढ़ी हैं, वहीं सरकार से जमीन प्राप्त करने सदस्यों की एक कमेटी फॉलोअप लेगी. 

फेंसिग हटाने के निर्णय से चर्चा 

विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वीणा तांबी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट को 6 मार्च, 2020 को सीनेट में पेश की गयी थी. सीनेट ने रिपोर्ट को न ही स्वीकारा और न ही खारिज किया. बल्कि सत्यशोधन के लिए समितियों के गठन का निर्णय लिया. इसके अनुसार रिटायर्ड जज वीणा ताम्बी की अध्यक्षता में जांच होगी. जबकि विवि को भूमि प्राप्त कराने के लिए सदस्यों की एक समिति सरकार स्तर पर फालोअप लेगी.

इस समिति में सिनेट सदस्य वसंत घुईखेड़कर तथा प्राचार्य डा. नीलेश गावंडे शामिल हैं. इन दोनों समितियों ने अपना काम शुरू कर दिया है. करोड़ों रुपये की यह भूमि अधिग्रहित करने में विश्वविद्यालय लगातार असफल रहा है. प्रबंधन परिषद ने विश्वविद्यालय की साख बन चुकी इस जमीन पर तार का फेंसिग निकालने के प्रबंधन परिषद के निर्णय के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है.

विवादित जमीन का मामला

विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से डेंटल कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर मौजे वडाली के सर्वे क्रमांक 103/3 और 103/4 में 2 हेक्टेयर 90 आर की निजी भूमि है. इस भूमि पर गणेश ट्रेडिंग कंपनी, चंद्रमा हाउसिंग सोसाइटी व प्रफुल्ल कुमार अग्रवाल का स्वामित्व है. इस भूमि के अधिग्रहण के लिए वर्ष 1983 से अमरावती विश्वविद्यालय जमीन मालिक से संघर्ष कर रहे हैं. अदालती लड़ाई के बाद जमीन हासिल करने के लिए एक नया प्रस्ताव दायर किया गया था. इस संबंध में सरकार के साथ चर्चाएं भी जारी है. भूमि गिनने के लिए 64,000 रु. गणना शुल्क का भी भुगतान 17 अक्टूबर 2015 को किया गया है.

13 जनवरी 2016 को उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के कक्ष में एक बैठक भी हुई. लेकिन, बैठक का प्रोसेडिंग अभी तक सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को नहीं भेजा गया है. इस दौरान प्रबंधन परिषद ने फेंसिंग हटाने के लिए मालिक के अनुरोध को मंजूरी दे दी है. इसके बाद विवादित भूमि मुद्दे की नए सिरे से चर्चा शुरू हुई. विवादित भूमि का मुद्दा सदस्य हिमांशु वेद द्वारा 24 नवंबर, 2018 को सीनेट की बैठक में उठाया गया. उसके बाद तत्कालीन सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीणा ताम्बी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई. समिति की रिपोर्ट फरवरी 2020 में सीनेट में पेश की गई थी. 

सीनेट ने लिया फैसला

सीनेट के फैसले के बाद दो समितियों का गठन किया गया है. नए नियमों और शर्तों के तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीणा ताम्बी की अध्यक्षता में एक सत्यशोधन समिति का गठन किया गया है. जबकि सरकारस्तर पर फॉलोअप के लिए सदस्य वसंत घुईखेड़कर व प्राचार्य डा. नीलेश गावंडे की एक समिति का गठन किया गया है. एक समिति की बैठक भी हुई है.- डा. तुषार देशमुख, कुलसचिव, अमरावती विवि