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दर्यापुर. खांसी, बुखार और सर्दी के साथ अन्य कोई भी तकलीफ होती है तो लोग देर न करते हुए जल्द ही अस्पताल पहुंच रहे है. जिसके कारण संपूर्ण तहसील में मरिजों की दौड़ उपजिला अस्पताल में ही होती है जिससे इस अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही थी. लेकिन अब स्थिति यह है कि गंदगी का प्रमाण भी इतना बढ़ रहा है कि मरीज ऐसे उपजिला अस्पताल में जाने के पूर्व ही यहां की गदंगी देख कोरोना होने के डर से यहां आने से भी कतराने लगे है. 

स्वच्छता अभियान की ऐसी तैसी

उपजिला अस्पताल में कोरोना काल में स्वच्छता होने की बजाए ऐसी गंदगी फैली हुई है कि मरीजों को अस्पताल में इलाज कराने जाने की नहीं ऐसा प्रश्न निर्माण हुआ है. सलाईन अस्पताल में फेंक दी जा रही है. इजेक्शन भी खुले में ही पड़े रहते है ऐसे में छोटे बच्चे को खतरा होने का डर लगा रहता है. कुछ मरीजों को भी अस्पताल में कोरोना होने का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है. शासन मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपयों खर्च कर रहा है बावजूद इसके मरीजों के लिए बेड़ की व्यवस्था भी नहीं कराई गई. मरीजों के बेड़ टूटे है तो कई बेड़ पर खून लगा है. बेड़ की सफाई भी कई महिनों से नहीं हुई. बावजूद इसके डाक्टरों की अनदेखी हो रही है. 

मनमानी का खामियाजा नागरिकों को 

उपजिला अस्पताल में डाक्टरों की मनमानी का खामियाजा नागरिकों की भुगतना पड़ रहा है. अस्पताल में कोई भी डाक्टर समय पर ड्युटी पर उपस्थित नहीं रहता. अधिकांश डाक्टरों की निजी अस्पताल रहने से अधिकांश समय वे अपने ही क्लिनिक में देते है. इसलिए उपजिला अस्पताल में मरीज पहुंचने से मरीजों को डाक्टरों का इंतजार ही करना पड़ता है. वहीं यह डाक्टर निजी अस्पताल में तुरंत ही उपलब्ध हो जाते है. सरकार डाक्टरों के वेतन पर करोड़ों रुपए खर्च करती है बावजूद इसके मरीजों को समय पर डाक्टर उपस्थित नहीं होने से ऐसे डाक्टरों की तुरंत ही तबादला करने की मांग दर्यापुर वासियों ने की है. 

कई बार शिकायत दी 

शासन से लाखों रुपयों का वेतन लेकर डाक्टर अपनी ड्यूटी में लापरवाही करते है. अस्पताल में यदि मरीजों पर अनदेखी की जाती है तो कार्रवाई होनी ही चाहिए. इस संदर्भ में कई बार शिकायते दी लेकिन शिकायतों का निपटारा नहीं किया. इसलिए मनसे स्टाइल में इसका जबाव देना पड़ेगा. मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए. – मनोज तायड़े, मनसे तहसील प्रमुख