कोरोना ने बिगाड़ा विकास कार्यों का नियोजन, मंजूर 50 लाख, मिले 15 लाख

    अमरावती. महानगर पालिका के पार्षदों को प्रतिवर्ष विकास कार्यों के लिए वार्ड विकास और स्वेच्छा निधि के तहत लाखों रुपए का निधि वितरित किया जाता है. इस वर्ष वार्ड विकास सुरक्षा निधि में बढ़ोतरी के बावजूद भी पार्षदों को विकास कार्य शुरू करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. भले ही कागजों पर वार्ड विकास व स्वेच्छा निधि में 50 लाख रुपए का नियोजन किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि पार्षदों को मात्र 15 लाख रुपए ही विकास कार्य करने की प्रशासकीय मंजूरी मिली है. जिसके चलते प्रभाग में विकास कार्य करने का नियोजन ही पूरी तरह से बिगड़ चुका है.

    कब होगा नियोजन 

    महानगर पालिका के पंचवार्षिक चुनाव फरवरी माह में होने की संभावना जताई जा रही है. जिसके चलते पार्षदों के लिए यह वर्ष विकास करने हेतु काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन कछुआ गति से किए जा रहे इन विकास कामों के कारण नागरिकों द्वारा पार्षदों की कार्यप्रणाली पर ही आपत्ति उठाई जा रही है.

    नागरिकों की मानें तो लाखों रुपए की निधि प्राप्त होने के बावजूद वर्षों बाद भी समस्याओं का निपटारा नहीं होता. कई क्षेत्रों में नाली और रपटे जैसी समस्या का भी निपटारा नहीं किया गया. अंतिम 6 माह में पार्षदों को प्रशासकीय काम मंजूर कर भूमिपूजन करवाना जरूरी होता है. लेकिन कोरोना के चलते पार्षद ही चिंता में पड़ चुके हैं.

    चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होगी निधि 

    कोरोना के कारण महानगरपालिका की आय पर असर हुआ है. सरकार से भी विशेष निधि प्राप्त नहीं हो रही जिसके चलते विकास कार्य और पार्षदों को दी जाने वाली निधि में प्रशासन द्वारा चरणबद्ध तरीके से वितरित करने का निर्णय लिया है. पार्षदों को निधि उपलब्ध कराई जाएगी.- चेतन गावंडे, महापौर

    पार्षदों से ही अपेक्षा 

    नागरिकों की सारी अपेक्षा पार्षदों से होती है. रपटा, नाली, सड़क कांक्रीटीकरण, उद्यान आदि समस्याओं के लिए यह निधि काफी कम है. कोरोना के कारण इस वर्ष निधि भी उपलब्ध नहीं हो पाई है. जिसके चलते विकास कार्यों में बाधाएं निर्माण हो रही है. इसीलिए नागरिकों की अपेक्षा पूर्ण करने में दिक्कतें निर्माण हुई है.- वंदना कंगाले, पार्षद

    निधि नहीं 

    जिस तरह पार्षदों को निधि वितरित होनी चाहिए. उस तरह इस वर्ष निधि वितरित नहीं हो पाई भले ही कागजों पर 50 लाख रुपए को प्रशासकीय मंजूरी दी गई, लेकिन वास्तव में पार्षदों को 15 लाख रुपए के कामों का नियोजन किया है. मनपा को आय नही इसलिए राज्य सरकार ने आर्थिक मदद करनी चाहिए.- कुसूम साहू, उपमहापौर 

    कैसा नियोजन करें 

    काम अधिक है और निधि कम. पार्षदों के पास समय भी कम है. इतने समय में नागरिकों की समस्या का समाधान कैसे करें यह प्रश्न है. लोगों को 50 लाख रुपए मंजूर होने से ऐसा लगता है कि लाखों रुपए के विकास काम होने हैं. लेकिन वास्तव में 15 लाख रुपए के ही इस्टीमेट बनाए गये. कोरोना के कारण विकास का नियोजन बिगड़ा है.- वंदना मडघे, उपसभापति, मनपा विधि समिति