Modi government aims to reduce road accidents by 50 percent by 2024
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    अमरावती. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश ने विभिन्न क्षेत्रों में काफी प्रगति की है, जिससे राष्ट्रीय और सामाजिक पुनर्निर्माण हुआ है. तकनिकी ज्ञान के आधार पर सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास हासिल करने के लिए शोधकर्ताओं को आगे आने की जरूरत है. इसके लिए ब्लू प्रिंट तैयार करने का प्रतिपादन उन्होंने शनिवार को संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत समारोह में किया.

    राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में आनलाइन आयोजित इस समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत, उपकुलपति डा. मुरलीधर चांदेकर, प्र-कुलगुरु डा. राजेश जयपूरकर, सर्व विद्याशाखाओं के डीन, प्रबंधन परिषद के सभी सदस्य उपस्थित थे.

    जीडीपी बढ़ाने की जिम्मेदारी लें

    विश्वविद्यालय ने लोनार झील अनुसंधान की जिम्मेदारी ली है. अमरावती मैनमेड फाइबर का केंद्र है. यहां संतरे के बाग हैं. गडकरी ने कहा कि विश्वविद्यालय को किसानों की आय और जीडीपी बढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. पेटेंट मिलने से प्रोफेसर खुश हैं. इस क्षेत्र में कपड़ा उद्योग है. कपड़ा बनाने के लिए आवश्यक लिनन को विदेश से आयात करना पड़ता है. इस क्षेत्र में लेनिन के पेड़ लगाने और उससे उपज लेने की जिम्मेदारी लेने की अपील उन्होंने कृषि अनुसंधानकर्ताओं से की.

    छात्रों को बीमा कार्ड- उदय सामंत

    उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि गाडगे बाबा के काम को छात्र आगे बढ़ाएं. राज्य सरकार छात्रों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रही है. छात्र बीमा योजना की खामियों को दूर किया जा रहा है. स्मार्ट कार्ड देने का प्रयास किए जाने की जानकारी सामंत ने दी.

    सभी क्षेत्रों में विवि का कार्य – राज्यपाल

    संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की बात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कही. छात्रों को अच्छी चीजों से प्रेरणा लेकर अपने संकल्प को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए. विश्वविद्यालय ने कोरोना, उन्नत भारत सहित कई सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य पर उन्होंने प्रशंसा की. 

    316 को पीएचडी 

    दीक्षांत समारोह में अनाथों के नाथ शंकर बाबा पापलकर को मानद डिलीट की उपाधि से सम्मानित किया गया. दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को 110 स्वर्ण, 22 रजत और 22 नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि 316 शोधकर्ताओं को ऑनलाइन आचार्य की उपाधि से सम्मानित किया गया.