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    परतवाडा/वरुड. एक सप्ताह से बारिश गायब रहने के कारण खरीफ फसलों के साथ-साथ सिंचित फसलों पर भी दुष्परिणाम पड़ रहा है. बारिश गायब होने से संतरे के हरे-भरे पौधे अब सूखने लगे हैं. परतवाड़ा तहसील में मर रोग और वरुड़ में कम पानी के कारण पौधे कमजोर हो रहे हैं. मृग बहार नहीं खिलने से किसान संकट में पड़ा है. वरुड़ तहसील में सर्वाधिक संतरा उत्पादन होने से इस वर्ष फिर एक बार संतरा उत्पादक किसान चिंता में डूबा है.

    अचलपुर में मर रोग फैला

    अचलपुर तहसील में संतरा बागानों पर मर रोग फैलने से संतरा के पौधे सूखने लगे हैं. काकड़ा, इसापुर परिसर में संतरा उत्पादक फिर एक बार संकट में पड़े हैं. श्यामपुर, शिंदी बुजुर्ग में मृग  बहार नहीं खेलने से किसान चिंतित है. शुरू मौसम में संतरा बागों पर बड़े पैमाने पर मृग बहार खिलता है. संतरे को बड़ी डिमांड रहने से दाम भी अच्छे मिल रहे है.

    इसलिए इस वर्ष किसानों की आशाएं पल्लवित हो उठीं. ऐसी स्थिति में संतरे पर मृग बहार नहीं खिलने और संतरा पौधे अचानक सूख जाने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है. मर रोग से संतरा के पौधे कम समय में ही सूख रहे हैं. आमतौर पर संतरे का पौधा 25 से 30 वर्ष तक जीवित रहता है. इस बीमारी से संतरे पर लगे फल भी सूखने से किसान चिंता में है.

    सर्वेक्षण का नुकसान भरपाई दें 

    4 एकड़ क्षेत्र में संतरे के 700 पेड़ लगाए थे. सभी पेड़ों पर फल लगे है, लेकिन मर रोग से पेड़ सूख रहे हैं. हरे पौधे अचानक सूख जाने से आर्थिक संकट निर्माण हो रहा है. इसीलिए सरकार ने सर्वेक्षण का नुकसान भरपाई देनी चाहिए.-बंडू पाटिल ठाकरे, इसापुर 

    कमजोर हो रहे पौधे 

    बारिश नहीं रहने से पहले ही पौधे सूखने लगे थे. ऐसे में मर रोग के कारण वरुड़ तहसील में मृग बहार भी नहीं खिला. जिससे किसान मुश्किल में फंसा है. -नामदेव देशमुख किसान, वरुड़