सड़क निर्माण के लिए दुसरी बार श्रमदान, डोमी गांव में आदिवासी बनाएंगे रास्ता

धारणी: डोमी गांव में सड़क के लिए दूसरी बार श्रमदान किया जा रहा है. सरकार की उदासीनता के कारण, सड़क बनाने के लिए आदिवासी आगे आए है. मेलघाट के दुर्गम इलाके के डोमी गांव में कोई सड़क नहीं होने से आदिवासी श्रमदान के माध्यम से सड़क निर्माण को फिर से शुरू कर सरकार का अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए रोष व्यक्त कर रहे है.

विकास को तरसे कई गांव

सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी मेलघाट के गांवों में सड़क विकास बैंड बजा हुआ है. डोमी गांव में भी यही हाल है. जिसके चलते आदिवासी परिवारों ने गांव तक पहुंचने के लिए श्रमदान से सड़क निर्माण फिर से शुरू कर दिया है. अतिदुर्गम क्षेत्र रुईपठार ग्राम पंचायत अंतर्गत 4 कि.मी. की दूरी पर डोमी गांव है. आजादी के पांच तप के बाद भी गांव जाने का कोई रास्ता नहीं है. यह आदिवासी क्षेत्र का दुर्भाग्य है. सरकार से कई शिकायतें की गई, लेकिन कोई उपाय नहीं हुआ. इसलिए, आदिवासी परिवारों ने सड़कों के निर्माण के लिए श्रमदान का निर्णय लिया है. पिछले छह महीने से रुईपठार ग्राम पंचायत से ग्राम सचिव के गायब होने से गांव विकास का बंटाढ़ार है.

इससे पहले भी बनाया रास्ता

चिखलदरा तहसील में राहु, बीबा, सरिता, सुमिता, सुलिता, एकताई, पिपल्या, हिल्डा, खारी, भांडुम जैसे कई गांव आज भी विकास से कोसों दूर है. ग्रामसेवक गांव से नदारद रहते है. जिससे क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं किया जा रहा है. डोमी गांव से मध्य प्रदेश तक की सड़क आदिवासी परिवारों द्वारा श्रमदान के माध्यम से बनाई गई थी. अब संपर्कहीन डोमित भूतरूम तक जाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी मुख्य सड़क तक 4 कि.मी. श्रमदान द्वारा एक अस्थायी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. ग्राम पंचायत द्वारा पेसा बारा वित्त योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं की जाता है. ग्रामसेवक दो महीने से गांव में नहीं आ रहे है, इसलिए आदिवासियों ने श्रमदान से सड़क विकास का काम शुरू किया है.

सरकार अस्तित्व नहीं

चिखलदरा तहसील के हतरू, चुरणी परिसर में सरकार अस्तित्व समाप्त हो गया है. किसी भी विभाग के कर्मचारी उपस्थित नहीं रहते है. जिसके चलते श्रमदान से सड़क निर्माण का निर्णय डोमी वासियों ने लिया है.- अशोक धिकार, डोमी