65,658 farmers deprived of crop loans

    • प्रक्रिया गतिमान करने पालकमंत्री के निर्देश

    अमरावती. आगामी खरीफ सीजन के लिए फसल ऋण वितरण के लिए जिले में 1500 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है. यह टार्गेट शत प्रतिशत पूर्ण करने के लिए प्रत्येक पात्र किसान को कर्ज देने की प्रक्रिया को आसान और गतिमान करने के निर्देश राज्य की महिला व बाल विकास मंत्री तथा जिला पालकमंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने दिए है. 

    अनावश्यक दस्तावेज मांगने पर कार्रवाई

    कोरोना संकट के दौरान पिछले साल से विभिन्न क्षेत्रों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. किसान भी कई तरह के दिक्कतें झेल रहे है. इसी के चलते खरीफ सीजन के लिए फसल ऋण का आसान वितरण आवश्यक है. इसके लिए अनावश्यक दस्तावेज ना मांगे अन्यथा संबंधित अधिकारी पर कडी कार्रवाई की चेतावनी पालकमंत्री ने दी है. किसानों से नो ड्यूज लेते समय 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर शपथपत्र की जगह स्वघोषणा पत्र लें.

    कृषि 7/12, आठ ए सीएससी केंद्र, सेतु सुविधा केंद्र या आपले सेवा केंद्र, महाभूमि पोर्टल से लिए गए डिजीटल हस्ताक्षर को स्वीकार करें. पटवारी 7/12 पर हस्ताक्षर मुहर की आवश्यकता नहीं होगी. ग्राम स्तरीय कोरोना समिति या ग्राम स्तरीय कृति समिति किसानों के आवेदन जमा कर बैंक व्यवसाय प्रतिनिधि या बैंक प्रतिनिधि के समन्वय से ऋण मामलों का निपटारा करें. फसल ऋण नवीनीकरण के लिए भी इसी तरह दस्तावेज लेकर ग्राम स्तर पर समन्वय से समस्याओं निपटाने की सूचना दी गई. 

    जिला बैंक ने  72 प्रश बंटा कर्ज 

    इस साल खरीफ के लिए जिले में 1,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य है. जिसमें जिला सहकारी बैंक ने 405 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है और लगभग 290 करोड़ रुपये याने 72 प्रतिशत का वितरण किया गया है. उसकी तुलना में अन्य बैंकों की वितरण प्रमाण कम है. इसलिए, राष्ट्रीयकृत और व्यापारी बैंकों ने अपने उद्देश्यपूर्ति के लिए प्रक्रिया गतिमान करें. इसके लिए बैंक प्रबंधकों को संबंधित गांवों में ग्राम स्तरीय समितियों के साथ समन्वय स्थापित करें. इच्छुक किसानों को पूरी जानकारी दें और सहयोग करें.

    कुल टारगेट में बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया को 50- 50 करोड़ रु., बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 250 करोड़ रु., कैनरा बैंक को 16 करोड़ रु., सेंट्रल बैंक को 210 करोड़ रु., इंडियन बैंक को 30 करोड़ रु., इंडियन ओवरसीज को 8 करोड़ रु., पंजाब नेशनल बैंक को 12 करोड़ रु., स्टेट बैंक को 310 करोड़ रु., यूको बैंक को 5 करोड़ रु., यूनियन बैंक को 57 करोड़ रु., एक्सिस बैंक को 12 करोड़ रु., एचडीएफसी और आईसीआईसीआई को 30-30 करोड़ रु., आईडीबीआई को 5 करोड़ रु., रत्नाकर बैंक को 1 करोड़ रु. और इंडसइंड बैंक को 50 लाख रु., विदर्भ कोंकण ग्रामीण बैंक कसे 18 करोड़ रु. लक्ष्य निर्धारित किया गया है.