महादेव संस्थानः पूर्व मेयर डोंगरे का बिल्डर जाजोदिया पर आरोप, 100 करोड़ का लैंड स्कैम

    अमरावती. पूर्व मेयर अशोक डोंगरे ने मंगलवार को बिल्डर चंद्रकुमार उर्फ लप्पी जाजोदिया पर जान से मारने की धमकी दिये जाने की रिपोर्ट दी. जिस पर फ्रेजरपुरा पुलिस ने धारा 294 के तहत एनसी दर्ज की है. इस मामले में डोंगरे ने रस्योद्घाटन किया कि 100 करोड़ के लैंड स्कैम के कारण ही उन्हें जाजोदिया केस पीछे लेने धमका रहे है. महादेव संस्थान की वडाली व उसके आस-पास की 69 एकड़ जमीन कूड़ के वारिस दिखाकर इस बिल्डर ने कौड़ीमोल भाव में खरीद ली.

    जबकि असिंचित जमीन पर कूड़ कानून लागू नहीं होता, लेकिन सुनियोजित तरीके से यह लैंड स्कैम अंजाम दिया या. जिसके खिलाफ महादेव संस्थान की ओर से मैं 3 वर्षों से लड़ाई लड़ रहा हूं. यह मामला पीछे लेने के लिए पहले मुझे लालच दी गई. नहीं मानने पर अब डरा-धमकाकर केस पीछे लेने दबाव बनाया जा रहा है. 

    नियमानुसार संस्थान को नोटिस तक नहीं

    डोंगरे के अनुसार वडाली में गुरुकृपा कालोनी में 8 एकड़ (सर्वे नं-69/2), वैष्णोदेवी मंदिर से सटकर 29 एकड़ (सर्वे नं-31/1) और चांदूर रेलवे-वैष्णोदेवी मंदिर के रोड पर 11 एकड़ (सर्वे नं-26/1) तथा रत्नापुर क्षेत्र में 21 एकड़ (सर्वे नं-43/3) महादेव  संस्थान के अधिकार की जमीन है, लेकिन कूड़ वारिसदार बताकर यह जमीन खरीद ली गई. हालांकि सात-बारह पर संस्थान का नाम भी दर्ज है, जिससे नियमानुसार खरीदी की परमिशन देने से पहले एसडीओ, तहसीलदार ने संस्थान की वर्तमान कार्यकारिणी को सूचित करना जरूरी था, लेकिन संस्थान की कार्यकारिणी में मृत हो चुके पदाधिकारियों के नाम से यह नोटिस निकाली.

    जबकि महादेव संस्थान ने अपनी नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की सूचनी वर्ष 2008-09 में ही धर्मदाय विभाग को सौंप दी थी, लेकिन सुनियोजित ढंग से यह फ्राड करने के लिए संस्थान के मृत हो चुके पदाधिकारियों के नाम से नोटिस निकाली गई. ताकि आगे पकोई प्राब्लेम ना आ सके. डोंगरे का आरोप है कि इस पूरे मामले में एसडीओ उदयसिंह राजपूत और तहसीलदार संतोष काकड़े ने सांठगांठ की.   

    10 वर्षों तक परमिशन नहीं दी जाती

    कूड़ कानून के अनुसार सात-बारह पर अन्य के तौर पर नाम दर्ज हो जाने के 10 वर्षों तक किसी संस्थान की जमीन खरीदी की परमिशन नहीं दी जा सकती है, लेकिन अचरज की बात है कि महादेव संस्थान की करोड़ों की खेती-बाड़ी व बेसकीमती जमीन पर कूड़ के वारिसदारों के नाम बताकर बिल्डर अमित चंद्रकुमार जाजोदिया के नाम से केवल 2 माह में ही खरीदी गई. जबकि 40-50 वर्षों पुराने कूड़ के जो वारिस बिल्डर ने खड़े किए, वे वास्तविकता में कूड़ के वारिस है या नहीं, इसकी तहकीकात किए बगैर ही कोर्ट केसेस के आधार पर खरीदी देना भी संदिग्ध है.  

    आखरी सांस तक लड़ेंगे

    महादेव संस्थान की जमीन इस तरह झूठे कूड़ दिखाकर नियमबाह्य ढंग से खरीदना एक बड़ा फ्राड है. पैसों के लिए इतना गिर जाना ठीक नहीं है. मुझे केस वापस लेने दबाव डाला जा रहा है. मंगलवार को वडाली में मेरी दूध डेयरी पर आकर धमकाया. जिससे पुलिस में रिपोर्ट दी है. हम महादेव संस्थान के सभी पदाधिकारी आखरी सांस तक यह लड़ाई लड़ेंगे और संस्थान की जमीन वापस लेकर ही रहेंगे.-अशोक डोंगरे, पूर्व मेयर

    कोर्ट की आर्डर पर खरीदी

    अशोक डोंगरे अनाप-शनाप आरोप लगा रहे है. हमने कोर्ट के आर्डर पर ही कूड़ के वारिसदारों से यह जमीन खरीदी है. कूड़ के वारिसदार 40 वर्षों से कोर्ट केस लड़ते हुए जीते है. जिसके बाद ही कूड़ के वारिसदारों से यह जमीनें खरीदी गई. जहां डोंगरे की दूध डेयरी है, उसी काम्प्लेक्स में मेरा 4000 स्केयर फीट का एक हाल है, जो मैं जरूरतमंदों को निशुल्क उपलब्ध कराता हूं. मंगलवार को वहीं गया था. डोंगरे ने अचानक मुझसे बदतमीजी शुरू कर दी. जिसकी वीडियो रिकार्डिंग भी मेरे पास है. डोंगरे के सभी आरोप बेबुनियाद है. -चंद्रकुमार जाजोदिया, बिल्डर