मेलघाट में थमा नहीं कुपोषण, 23 माह का बच्चा अतिकुपोषण की श्रेणी में

    धारणी. तीन दशकों से कुपोषण का अभिषाप झेल रहे मेलघाट में यह त्रासदी अभी भी शुरू है. कुपोषण से बालमृत्यु, माता मृत्यु का तांडव जारी रहने के बाद भी प्रशासन सैम व मैम के आंकड़े दिखाकर नियंत्रण पाये जाने का दावा करने में ही धन्यता मान रहा है. धारणी मुख्यालय से 12 किलो मीटर अंतर पर घुटी गांव में अतिकुपोषित श्रेणी में एक बालक अभी भी जीवन और मौत के बीच झूल रहा है.

    घुटी निवासी  दिनेश पटोरकर का तीसरा बेटा सुमित दिनेश पटोरकर जन्म से कम वजन का है. जिससे वह अतिकुपोषित की श्रेणी में है. आयु के 23 माह में भी इस बच्चे का वजन सामान्य नहीं हो पा रहा है. जिसके लिए मेलघाट का प्रशासन जिम्मेदारा होने का आरोप उसके परिजन लगा रहे है.  

    एनआरसी में रखने की जरूरत नहीं समझी 

    गत् दो वर्षों से सुमीत पटोरकर कुपोषण की श्रेणी में होने के बाद भी आज तक स्वास्थ्य प्रशासन व स्थानीय महिला व बाल विकास विभाग द्वारा अभी तक इस बच्चे को अस्पताल में दाखिल करने सुध नहीं लिए जाने से रोष देखा जा रहा है. केवल आंकड़ों का डंका पीटकर कुपोषण के साथ बाल व माता मृत्यु कम होने का दावा करने में ही प्रशासन मग्न है. यही कारण है कि मेलघाट पर तीन दशकों से लगा कुपोषण का कलंक दूर होने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि घुटी की आंगनवाड़ी सेविका व सहायक सुमीत को शासन की सभी सेवाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन महिला व बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने सुमीत को एनआरसी में भर्ती कराने की जरूरत नहीं समझी. 

    उपचार में सुधार नहीं 

    सुमीत को साद्राबाड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया था. वहां जाने पर बिठाकर रखा गया. उपचार नहीं कराया गया. धारणी में भी 14 दिन रखे जाने पर भी तबियत में कोई सुधार नहीं हो पाया- शर्मिला पटोरकर, सुमीत की मां