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अमरावती. कोरोना महामारी और अतिवृष्टि ने तीज त्यौहारों का मज किरकिरा कर दिया. अतिवृष्टि के चलते फुल की खेती का नुकसान हुआ जबकि कोरोना के कारण ग्रिष्मकाल में ही फुलों की खेती सुख जाने से किसानों का रिकार्ड़ तोड़ नुकसान हुआ है. जिसके चलते पहली बार त्यौहारों के दिनों में जिले के फुलों की बजाए बाहरी राज्यों से फुलों की आवक हो रही है. फलस्वरुप फुलों के दाम भी आसमांन छुने लगे है. गत वर्ष 20 रुपये किलो मिलनेवाले गेंदा फुल इस वर्ष 80 से 100 रुपये किलो बेचे जा रहे है. 

कोरोना से उजड़े बाग बगीचे

जिले में फुल उत्पादक किसानों का कोरोना के चलते काफी नुकसान हुआ. मार्च माह से शुरू लाकडाउन के कारण बाग बगीचे पूरी तरह से उजड़ गये. ग्रिष्मकाल के दिनों में पानी देना तो दूर फुलों की डिमांड़ भी नहीं थी. शादी, मंदिर, कार्यक्रम बंद रहने से बगीचों को पैसा लगाने की बजाए बगैर पानी के ही सुख गये. जैसे तैसे किसानों ने अनलाक में खेती करने का प्रयास किया तो अतिवृष्टि से फुलों के बीज पूरी तरह से जल गये. जिससे किसानों को दोहरी मार सहन करनी पड़ी. ऐसे में गेंदा फुल की आवक जिले से गत वर्ष की तुलना में नहीं के बराबर ही है. 

गिनी चुनी दुकानें सजी 

फुल व्यवसायी शेख नासीर ने बताया कि फुलों की कीमतों को देखकर ही इस वर्ष फुलों की दुकान सजानेवालों की संख्या भी 50 प्रतिशत से कम हो चुकी है. शहर में राजापेठ, दस्तुरनगर, गांधी चौक, जयस्तंभ चौक, गाडगेनगर आदि पर फुलों की सड़क किनारे 100-150 से अधिक दुकाने सजायी जाती है. लेकिन इस वर्ष गिने चुने छोटे व्यवसायिकों ने ही दुकान सजाने का प्रयास किया. लोग भी 100 रूपये किलो सुनकर गेंदा के फुल लेना की नहीं इसका विचार कर रहे है. फुलों की डिमांड़ है, लेकिन महंगे होने से लोग विचार कर रहे है.