उपेक्षा: लागत खर्च 11,610 आय होगी 10,800 रुपये

  • 120 दिनों की मेहनत खेत में पडी

चांदूर बाजार. चांदूर बाजार तहसील में गुरुवार की सुबह जमकर बरसी तूफानी बारिश से किसानों का सर्वाधिक नुकसान हुआ है. 120 दिनों तक लगातार मेहनत करने के बाद भी फसल हाथ नहीं आने से किसान चिंता में डूबा है. गुरुवार को बारिश और शुक्रवार को बादल से घिरे रहने के कारण इस वर्ष सोयाबीन त्यौहारों की बजाए किसानों को रुलायेगा क्या? ऐसा सवाल निर्माण हो रहा है. क्योंकि सोयाबीन का लागत खर्च 11,610 रुपये है जबकि प्रति एकड आय होगी 10,800 रुपये यानी सोयाबीन भी किसानों के लिए घाटे का सौदा रहा है. 

क्वालिटी व उत्पादन पर असर 

चांदूरबाजार तहसील में 16142.62 हेक्टेयर में बुआई सोयाबीन हुई. जबकि उड़द 76.10 हेक्टे., मूंग की 7.10 हेक्टेयर में बुआई हुई. लेकिन इस वर्ष सोयाबीन का हंगाम शुरु होने से लेकर कटाई तक सभी किसान सोयाबीन के नाम से रोने लगे है. शुरुवात में बारिश की लुकाछिपी से कई किसानों को दुबार बुआई करनी पडी. जैसे तैसे मूंग और उडद के बाद सोयाबीन फसल से ही किसानों में नई उम्मीदे जागी थी. इसलिए किसानों ने भी बुआई से लेकर कटाई तक प्रति एकड 11 हजार 610 रुपये के हिसाब से बुआई खर्च भी उठाना लेकिन हाल ही में हुई बारिश के कारण अधिकांश सोयाबीन बारिश में ही भीग जाने से काला पड गया. इतना ही नहीं तो कहीं पर सोयाबीन अत्याधिक बारिश में रहने से उसे अंकुर फूट गये है. जिससे निश्चित ही क्वालिटी व उत्पादन पर असर होगा. 

कपास व संतरा भी खतरे में 

सोयाबीन की तुलना में कपास की रिकार्ड तोड 18840.85 हेक्टेयर में बुआई की गई. अत्याधिक बारिश के कारण सोयाबीन के साथ साथ कपास व संतरे पर भी असर हो चुका है. कपास के बोंड सडकर जमीन पर गिरने लगे है. संतरे की भी टपकन शुरु हो चुकी है. मूंग उडद तील जैसी फसलें इस वर्ष किसानों को देखने के लिए भी नहीं मिली. बारिश के कारण अभी तक दलदल निर्माण हुई है. पगडंडी मार्ग भी पूरी तरह से उखड जाने से किसान खेतों तक सोयाबीन निकालने के लिए मशीन भी नहीं ले जा पा रहे है. क्वालिटी व आय घटने के बाद भी सोयाबीन ले जाने का खर्चा उठाना पड रहा है जिसके चलते किसान भी इस सोयाबीन को खेतों में सडने दे रहे है.