Net speed is becoming an obstacle in online education

    नांदगाव खंडेश्वर: विगत एक से डेढ़ साल से भी अधिक समय से सभी स्कूलें बंद हैं, और बच्चों की पढ़ाई आनलाइन शुरू है. लेकिन यही आनलाइन शिक्षा अब पालकों की परीक्षा साबित हो रही है. एक ओर जहां कोरोना महामारी के चलते सभी उद्योगों के साथ छोटे,मोटे व्यवसाय,रोज़गार के अवसर समाप्त होने की दहलीज़ पर हैं. लोगों को भयावह तंगहाली का सामना करना पड़ रहा है. जिससे परिवार का पालन पोषण करने में ही काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ रहा है.

    शालाओं पर भी ताले लटके रहने से छात्रों का शैक्षणिक भविष्य भी दांव पर हैं. पिछले साल से शिक्षा विभाग ने सभी स्कूली छात्रों को आनलाइन शिक्षा देने का फरमान जारी कर उस पर अमल भी शुरू कराया. लेकिन शिक्षा विभाग के इस निर्णय का विपरित असर अब पालकों पर हो रहा है. पहले ही बेरोजगारी ऊपर से बच्चों की पढाई का टेंशन व उसके लिए एण्ड्राइड मोबाइल फोन व हर महीने का रिचार्ज के लिए पालकों को भारी जद्दोजहद से गुजरना पड़ रहा है.

     इंटरनेट व मोबाइल देने की मांग  

    शिक्षा विभाग ने छात्रों के पढाई में खलल ना पड़े इस के लिए आनलाइन क्लासेस शुरू तो किए लेकिन प्रत्येक छात्र के पास एण्ड्राइड मोबाइल नहीं है. इस पर ध्यान ही नहीं दिया. कोरोना महामारी ने जनसामान्यों से लेकर खास व आम तक सभी स्तरों पर के उदरनिर्वाह के संसाधनों को पूरी तरह तबाह कर दिया. अब लोगों को परिवार के रोजी-रोटी का प्रबंध करने को भी भारी  कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बच्चों के लिए एण्ड्राइड मोबाइल फोन कैसे खरीदे यह परेशानी पालकों को सता रही है.

    आज के दौर में अधिकांश लोगों के पास मोबाइल तो हैं. परंतु वह साधा फोन हैं. पहले ही लोगों के मोबाइल फोन में बैलेंस के लाले होते है और प्रतिदिन बच्चों के आनलाइन शिक्षा क्लास हेतु नेट मिनीमम 200 रुपयों का रिचार्ज करना पड़ता है. यह अतिरिक्त खर्च पालकों का बढ रहा है. इस लिए शिक्षा विभाग व सरकार बच्चों की पढाई का खयाल कर मोबाइल सेट व इंटरनेट का प्रबंध करें. यह मांग व्यथित पालक वर्ग कर रहा है.

     बच्चों की आदत बिगड़ने का डर

    वैसे भी अधिकांश पालक बच्चों को मोबाइल देने के पक्ष में ही नहीं रहते. ऐसे में बच्चों को एण्ड्राइड मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन के साथ सौंपने पक्ष में पालक वर्ग नहीं है. आनलाइन शिक्षा के आड़ में बच्चे द्वारा मोबाइल का गैर इस्तेमाल किए जाने का डर पालकों को सता रहा है. जिस पर शिक्षा विभाग व सरकार संज्ञान ले यह गुहार भी परेशान पालक लगा रहे है.