पान पिंपरी उत्पादक अनुदान से वंचित

  • कृषि विभाग ने नहीं भेजा मांग प्रस्ताव

अंजनगांव सुर्जी. पान पिंपरी, मुसली जैसी फसलों के लिए दिया जाने वाला अनुदान कृषि विभाग के अडियल रवैय्ये के चलते अटका है. यह आरोप किसानों ने लगाया है. उन्होंने बताया है कि केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान का प्रावधान किए जाने के बावजूद कृषि विभाग द्वारा मांग का प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया है. जिससे किसान वर्ष 2018-19 के अनुदान से वंचित है. 

आर्थिक संकट में फंसे किसान

पान, पिंपरी व मुसली को वर्ष 2011 तक रोगगार गारंटी योजना के तहत अनुदान दिया जाता था. लेकिन यह अनुदान बंद किए जाने पर किसान मनोहर मुरकुटे, संजय नाठे, मनोहर भावे, हेमंत माकोडे व अन्य किसानों नं आंदोलन किया जिसके बाद यह अनुदान नियमित हुआ. पुन वर्ष 2017-18 में फिर कृषि विभाग द्वारा त्रृटि पूर्ण प्रस्ताव के चलते  यह अनुदान बंद हुआ. इस समय नागर्जून पान पिंपरी उत्पादक संघ व अन्य किसानों द्वारा तत्कालिन विधायक रमेश बुंदेले व पूर्व कृषि मंत्री डा. अनिल बोंडे के सहयोग से अनुदान पुन शुरु करवाया. लेकिन 2018-19 का अनुदान फिर रोका गया है. जबकि इस बार किसान गहरे आर्थिक संकट में है. जिससे  अनुदान की राशी की आवश्क्ता है. 

केन्द्र ने दी 21 करोड 24 लाख तो सहमती

जबकि वर्ष 2018-2019 के लिए 60 प्रतिशत हिस्ता केन्द्र सरकार का होता है उसके लिए सरकार ने 9 हजार 958 हेक्टेअर क्षेत्र में वन औषधि लगाने को मंजूरी दी है. इसके लिए 21 करोड 24 लाख रुपए की मंजुरी को सहमति दी गई है. लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से अनुदान मांग का प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया. ऐसे में अब किसानों ने तीव्र आंदोलन करने का निर्णय लिया है. इन किसानों में मनोहर मुरकुटे, मनोहर भावे, मधुकर  गुजर, सतिश ढगे, हर्षल पायधने, रितेश आवड़कर, गौरव चांदूरकर, शाम गुजर, सुनील बोराडे आदि का समावेश है. इस संदर्भ में कृषि मंत्री दादाराव भुसे, पालकमंत्री यशोमति ठाकुर व विधायक बलवंत वानकडे को निवेदन दिया है.