राज्यपाल कोश्यारी से मिले एमएलए राजकुमार पटेल

  • 24 गांवों में बिजली पहुंचाने का वादा
  • मेलघाट की समस्याओं पर चर्चा

अमरावती. देश की आजादी के 70 वर्षों बाद भी बिजली से वंचित आदिवासी बहुल क्षेत्र मेलघाट के 24 गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए मैं जल्द ही प्रयास करुंगा. राष्ट्रपति से भी इस बारे में चर्चा करुंगा. यह वादा राज्यपाल भगतसिंग कोश्यारी ने विधायक राजकुमार पटेल सहित उनसे मिलने पहुंचे प्रतिनिधि मंडल से किया.

उन्होंने इस बारे में संबधित अधिकारियों से भी स्थिति की जानकारी व रुकावटों का संज्ञान लेने की बात कही. बुधवार को मेलघाट के विधायक राजकुमार पटेल मेलघाट की समस्याओं को लेकर राज्यपाल से मिले. इस समय उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के लोग किन हालातों में जीने पर मजबूर है. इसकी जानकारी राज्यपाल को दी. 

इन गांवों में नहीं हैं बिजली

इस समय उन्होंने बताया कि आदिवासी बहुल धारणी व चिखलदरा तहसील के 24 गांव ऐसे हैं. जहां पर बिजली तक नहीं है. यहां के लोग मुलभूत सुविधाओं से भी वंचित है. इतना ही नहीं तो सैकड़ों गांवों में पक्की सड़कें तक नहीं बनी है. जिन गांवों में बिजली नहीं है. उनमें माखला, नायलगांव, रायपुर, सावर्याखेड़ा, मारीझरप, बोरट्याखेड़ा, पिपल्या, सुमिता,  टेंब्रु, रेहाटखेड़ा, चुनखड़ी, कुलिदा, खड़ीमल, बिच्छुखेड़ा, चिपर्डा, कुंड, राक्षा, रंगूबेली, ढोखा, खामदा, कोकमार, मलिता, भावाई गांवों का समावेश हैं.

स्वंतत्र एजेन्सी नियुक्त करें

इस काम का डीपीआर तैयार किया गया है. यह गांव मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट के तहत में समाविष्ट होने के कारण बिजली लाइन डालने के लिए इस विभाग की अनुमति आफलाइन प्रणाली है, लेकिन अब मेलघाट टाइगर प्रोजेक्ट के अधिकारी प्रोजेक्ट नोट, नक्शा, टोपोशीट, गूगल अर्थ मैप, एथारिटी लेटर आनलाइन मांग कर रहे है. इन  प्रस्ताव के लिए गांववार 2 से 2.5 लाख रुपए का खर्च अपेक्षित है. जबकि जिले की बेरोजगार संस्थाएं केवल 40,000 रुपए में यह काम करने को तैयार है. ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त कर यह प्रस्ताव तैयार किए जाने जाने की आवश्यकता है. आउट सोर्सिंग से यह नियुक्तियां की जाए व तत्परता से बिजली सप्लाई का काम किया जाए.  यह मांग की गई. 

पेसा के तहत मिले सुविधाएं

दुर्गम गांवों में सड़क निर्माण, पेसा कानून के तहत मुरुम, रेती, तेंदूपत्ता, महुआ, गोंड, आयुर्वेदीक औषधि, जंगली सब्जियों पर आदिवासियों का अधिकार होने के बावजूद टाइगर प्रोजेक्ट के अधिकारियों द्वारा उन्हें रोका जाता है. कार्रवाई की जाती है. इसे रोकने, आदिवासियों को शुध्द पेयजल, सड़क आदि की व्यवस्था करने जैसे मुद्दे भी इस समय राज्यपाल के संज्ञान में लाए गए. लगभग 45 मिनट तक चली इस चर्चा के दौरान अन्य जिलों के आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विधायक भी शामिल थे. विधायक पटेल ने उक्त मांगों को लेकर राज्यपाल को निवेदन भी दिया.