Shivsena responsible for privatizing departments in Manpa BJP leader attacked

अमरावती: शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार कई तरह की रोचकता के‍ कारण चर्चा का विषय बना है. केवल शिवसेना यानि महाविकास आघाड़ी प्रत्याशी ही नहीं बल्कि कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के सगे संबंधी और घनिष्ठों के लिए भी यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. पहली बार अलग-अलग चुनाव लड़ रही शिवसेना और भाजपा के लिये यह प्रतिष्ठा की लड़ाई मानी जा रही है.

जिससे दोनों दलों ने ताकत झोंक दी है. विधान परिषद में भाजपा को बहुमत के लिए 4 सीटों का जुगाड़ करने की तिकड़म में खुद देवेंद्र फडणवीस भी अमरावती का दौरा कर स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हुए हैं. तू डाल-डाल. मैं पात-पात. की तर्ज पर शिवसेना भी अपने प्रत्याशी के लिए उपनेता अरविंद सावंत का दौरा करवा चुकी है. 

साले के विरोध में प्रचार 

शिवसेना के वर्तमान एमएलसी प्रा. श्रीकांत देशपांडे महाविकास आघाड़ी के संभाग में पहले उम्मीदवार है. वहीं शिवसेना के जिला प्रमुख राजेश वानखड़े के साले चंद्रशेखर उर्फ शेखर भुयार भी इस चुनाव में लगातार दूसरी बार दांव आजमा रहे हैं. जबकि राजेश वानखड़े के सगे भांजे नितिन गुड़धे पाटिल शिक्षण संघर्ष समिति से किस्मत आजमा रही संगीता शिंदे के साथ प्रचार में लगे हैं. जबकि गुड़धे शिवसेना की टिकट पर नगरसेवक का चुनाव लड़ चुके हैं. संपर्क नेता अरविंद सावंत भी अपने अमरावती दौरे में संबंधितों को पूरी शिद्दत से जुट जाने की घुटी पीलाकर गए हैं. 

बहन के खिलाफ जुटे पूर्व पालकमंत्री 

शिंदे तत्कालीन पालकमंत्री डा. अनिल बोंडे की छोटी बहन है. जिससे बहन के खिलाफ ही बोंडे को भाजपा प्रत्याशी डा. नितिन धांडे के लिये शिक्षकों से वोट मांगने जुटना पड़ रहा है. यही नहीं बल्कि पूर्व पालकमंत्री प्रवीण पोटे पाटिल की अध्यक्षता वाले पोटे पाटिल एज्युकेशन इन्स्टिट्यूट के उपाध्यक्ष दिलीप निंभोरकर भी चुनावी मैदान में शिक्षक भारती के उम्मीदवार है. इसी तरह कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय व जिला बैंक का संचालक प्रकाश कालबांडे भी विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर पर दांव लगा रहे हैं. जिससे जिले के कांग्रेस पदाधिकारियों का भी टेंशन बढ़ गया है. महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस इस बार शिवसेना प्रत्याशी प्रा. श्रीकांत देशपांडे के लिये जुटी हैं.