खरीदारी के लिए रिकार्ड़ भीड़, दीपावली पर मार्केटों में लौटी रौनक

अमरावती. मार्च माह से कोरोना के कारण मार्केट की रौनक गायब हो चुकी थी. वह 6 माह बाद दीपावली जैसे सबसे बड़े त्यौहार पर लौट आयी है. जहां देखो वहां भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है. सर्वाधिक भीड़ कपड़ा और पूजा साहित्य के प्रतिष्ठानों पर दिखाई दे रही है. शहर के व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्रों में सहपरिवार खरीदी के लिए लोग उमड़ने से सड़कों के साथ-साथ दूकानों में भी खड़े रहने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है. हालांकि ऐसी रौनक देख कर व्यापारियों द्वारा संतोष जताया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर मार्च माह से खरीदी करने के लिए डर रहे नागरिक भी मनमानी तरीके से अब खरीदी करने में जुटे है. 

जिलों से भी पहुंच रहे लोग 

दीपावली को मात्र 3 दिन शेष बचे है. गुरुवार को धनतेरस रहने से लोग कपड़ा और पूजा साहित्य की खरीदी पूर्ण करने पर जोर दे रहे है. रविवार से मार्केट में खरीदी के लिए भीड़ देखी जा रही है. जिसके कारण रविवार होने के बावजूद व्यापारियों ने भी प्रतिष्ठान खुले रखे. शहर के साथ साथ जिलों के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भी खरीदी करने के लिए लोग पहुंच रहे है. जिसके कारण व्यापारियों के चेहरे पर भी रौनक देखी गई. जवाहर रोड, जयस्तंभ चौक, सराफा बाजार, गांधी चौक, राजकमल चौक, सरोज चौक, श्याम चौक, राजापेठ, पंचवटी चौक, कठोरा नाका, रविनगर क्षेत्र, नवाथे प्लाट समेत बडनेरा में भी ग्रामीण क्षेत्रों से आनेवाले लोगों के कारण जमकर भीड़ उमड़़ी हैं. 

नियमों की धज्जियां 

प्रशासन ने कोरोना की दूसरी लहर की चेतावनी दी है. शहर में फिलहाल कोरोना के आंकड़े लगातार कम होने का दावा भी प्रशासन ने किया है. जिसके कारण लोग भी बेफ्रिक होकर खरीदी कर रहे है. इस दौरान व्यापारियों के साथ साथ नागरिको की ओर से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. सोशल डिस्टसिंग तो दूर लोग हाथों को सैनिटाइज भी करने से परहेज करते दिखाई देर रहे है. विशेष बात यह है कि कपड़े खरीदी के लिए बच्चों के साथ माता पिता भीड़ में पहुंचते है तो उस समय बच्चों के चेहरों पर मास्क भी नहीं होता. जिससे यह कहना भी गलत नहीं होगा कि मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है. 

कपड़ा मार्केट के लिए सौगात 

कपड़ा मार्केट के लिए यह काफी अच्छे दिन है. लोगों ने मार्च माह से कपड़े खरीदी करने से परेहज ही किया था. इसलिए दिवाली में भले ही बजड़ न हो तो बच्चों के लिए कपड़े खरीदी जाएंगे ऐसा अनुमान लगाया था लेकिन बड़े भी कपड़े खरीदी करने में जुटे रहने से उम्मीद से अधिक रौनक छायी है. – पुरुषोत्तम हरवानी, सम्राट मेन्स वेअर