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  • सातारा, अंबाजोगाई, पुणे, नाशिक, मुंबई व विदर्भ में बिक्री ! 

दापोरी. रिकार्ड संतरा उत्पादन के लिये जाने जाते वरुड़-मोर्शी तहसील में 45 हजार हेक्टेयर पर संतरा का उत्पादन लिया जाता है. लेकिन इस वर्ष संतरा को दाम नहीं मिलने से आर्थिक संकट में घिर गए है. प्रचलित पध्दति केवल संतरा व्यापारियों के हित की साबित हो रही है. जिससे रवाला ग्राम के प्रगतिशील युवा किसान चिन्मय फुटाणे ने अपने मार्केटिंग के सफल प्रयोग से आशाएं पल्लवित कर दी है. फुटाणे ने डायरेक्ट मार्केटिंग कर संपूर्ण खर्च वसूल कर औसतन 40 रुपए किलो से अपना संतरा बेचकर मिसाल कायम की है. 

व्यापारी अत्यअल्प दाम में मांग रहे बगीचे    

विदर्भ का मुख्य उत्पादन संतरा को इस वर्ष योग्य दाम नहीं मिल रहे है. जिससे उत्पादन खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है. 35 से 40 रुपए किलो बेचे जाने वाला संतरा केवल 7 से 8 रुपए किलो बेचने की नौबत आ गई है. इतने अत्यअल्प दाम में संतरा बेचन पर तुड़ाई का खर्च भी वसूल नहीं हो पा रहा है. जिसके कारण अधिकांश संतरा उत्पादक अपने बागानों से संतरा तोड़ने में भी रुचि नहीं ले रहे है. लेकिन अगले वर्ष अंबिया बहार लेने के लिए दिसंबर में यह संतरा तोड़ना जरुरी हो गया है. ताकि 10 जनवरी से संतरा बगीचों का व्यवस्थापन किया जा सके. संतरा उत्पादकों की इसी मजबुरी का लाभ उठाकर संतरा व्यापारी अत्यअल्प दाम में संतरा की बोली लगा रहे है.   

 जैविक पध्दति से लिया आंबिया बहार

इसी संकट को अवसर में बदलते हुए रवाला के संतरा उत्पादक किसान चिन्मय फुटाणे ने सीधे सातारा, अंबाजोगाई, मुंबऎई, पुणे, नाशिक समेत विदर्भ के गोंदिया, वर्धा, अमरावती, अकोला,  जैसे शहरों में अपना संतरा भेजकर मार्केटिंग के माध्यम से खर्च निकालकर औसतन 40 रुपए किलो के दाम प्राप्त किए. इस युवा किसान ने पांच एकड़ में संतरा लिया है. जिसमें से ढाई एकड़ हलकी और शेष ढाई एकड़ भारी जमीन है. इस वर्ष लगातार बारिश व अतिवृष्टि के कारण हलकी जमीन पर आंबिया बहार के फल आए. ढाई एकड़ में साड़े 6 टन संतरा उत्पादन हुआ.   सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत चिन्मय के पिता वसंतराव फुटाणे पिछले 38 वर्षों जैविक पध्दति से कृषि करते है. संतरा भी जैविक पध्दति से लेते है. जिससे जैविक कृषि माल उत्पादक के रुप में उनकी पहचान है.  

एसटी पार्सल का उठाया लाभ 

चिन्मय ने सोशल मीडिया पर जैविक संतरा उत्पादन की जानकारी प्रसारित की. जिससे जैविक खेती के बारे में अन्य किसानों में भी जनजागृति हुई. सोशल मीडिया के माध्यम से सीधे ग्राहकों ने उनके संतरा फल 90 से 60 रुपये किलो के भाव से हाथों-हाथ खरीदे. जिससे उत्पादन खर्च निकालकर फुटाणे को प्रति किलो 40 से 50 रुपये का मुनाफा हुआ. एसटी पार्सल, रेलवे व निजी बस से संतरा सीधे ग्राहकों तक भेजा. परिवहन का खर्च भी ग्राहकों से लिया. पारंपारिक पध्दति से लकड़ी के बाक्स में संतरा पैकिंग कर भेजा. मार्केटिंग की इस पध्दति को जबरदस्त प्रतिसाद मिला. डिससे अगले वर्ष बड़े पैमाने पर संतरा देश के विभिन्न शहरों में भेजने का संकल्प चिन्मय ने व्यक्त किया है. 

स्वादिष्ट संतरा ग्राहकों तक पहुंचाने का लक्ष्य 

संतरा उत्पादकों को अच्छे दाम मिले. ग्राहकों को दर्जेदार संतरा उपलब्ध हो, इसके लिये उत्पादक सीथे ग्राहकों को संतरा बिक्री का उपक्रम चलाया. ढाई एकड़ में साड़े 6 टन उत्पादन हुओआ. 5 टन 170 किलो संतरा सीधे ग्राहकों को की. जिससे 2 लाख 40 हजार की आय प्राप्त हुई. बाजार में 10 रुपए किलो के भाव होने पर भी हमने डायरेक्ट मार्केटिंग के माध्यम से उत्पादन खर्च निकालकर 40 किलो के दाम प्राप्त किए. रासायनिक खाद का इस्तेमाल न करते हुए अच्छी क्वालिटी का स्वादिष्ट संतरा ग्राहकों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है.- चिन्मय फुटाणे, संतरा उत्पादक