शकुंतला रेल नवीनीकरण की बजाए की गयी बंद  -मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर

  • रेलवे लाइन ब्रॉडगेज की अनदेखी

मुर्तिजापुर. शकुंतला रेलगाड़ी की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है और इसका नवीनीकरण करने की बजाय, इसके अस्तित्व पर हमला किया जा रहा है. एक ओर मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर रेल मार्ग का ब्रॉड गेज में परिवर्तन करने के लिए लगनेवाले खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने के संदर्भ में रेल मंत्रालय ने पत्राचार किया. इसके बावजूद कोई प्रतिसाद न मिलने से  ‘शकुंतला’ नाम से परिचित इस रेलगाड़ी का नवीनीकरण कब किया जाएगा इस ओर सभी की नजरे लगी हुई है.

उसी तरह इस मार्ग को बंद करने का प्रयास भी पिछले कई वर्षों से शुरू है. शकुंतला रेलवे की फेरिया बंद की गई है. तब से ही इस संदर्भ में अलग विचार की आशंका व्यक्त की जा रही थी. इस संदर्भ में जनप्रतिनिधियों द्वारा भी आवाज उठायी नहीं गयी है. इन रेल मार्गों की ओर रेल प्रशासन द्वारा विभिन्न कारण को सामने रखकर इस ओर अनदेखी की है. जिससे इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है. रेल विभाग द्वारा सन 1914 में अंग्रेजों ने इस रेल को शुरू करवाया था.

विकास की जगह रेलवे विभाग द्वारा मुर्तिजापुर रेलवे स्टेशन पर पानी भरने की सुविधा को बंद कर इसे बडनेरा रेलवे स्टेशन पर ले जाया गया. इसी तरह कई सुविधाओं को धीरे-धीरे स्थानांतरित किया गया. डाक, माल, पार्सल सुविधाओं और लोको शेड आदि सुविधाएं बंद की गयी. लोकसभा की याचिका समिति ने इस रेलवे लाइन के ब्रॉड गेज परिवर्तन की सिफारिश की थी. रेलवे प्रशासन ने जुलाई 2005 और अक्टूबर 2008 में इस मार्ग का प्रारंभिक इंजीनियरिंग-परिवहन सर्वेक्षण (पीइटीएस) किया. समय-समय पर, रेलवे ने वित्तीय प्रावधान और यात्रियों की संख्या की ओर इशारा करते हुए इस मार्ग के रूपांतरण की उपेक्षा की.

रेलवे ने इसे ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने के बजाय मार्ग को बंद करना शुरू कर दिया. इस मार्ग के आठ स्टेशन भी बंद कर दिए गए. हालांकि, यात्री दरों में वृद्धि के बावजूद ट्रेन सेवा किसी तरह से शुरू थी. शकुंतला रेलवे लाइन का निर्माण अंग्रेजों ने वर्हाड़ के कपास और विदर्भ से उच्च गुणवत्ता वाले सागौन को सीधे मैनचेस्टर परिवहन के लिए किया था.

उन्होंने भौगोलिक, पर्यावरणीय, पर्यटन और वाणिज्यिक महत्व की जांच के बाद ही इस मार्ग को चुना होगा. इसलिए अंग्रेजों को तब यह एहसास हुआ था कि यह मार्ग कितना उपयोगी है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसके महत्व का एहसास नहीं हो रहा है. जिससे यह बात विदर्भ के लोगों का दुर्भाग्यपूर्ण है, की शकुंतला का? इस बात को लेकर लोगों में चर्चाएं शुरू हैं.